शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ काञ्चनाभाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपस्वर्ण-आभा
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
स्वर्ण (सोने) के समान चमकती आभा और कांती वाले भगवान को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कृत्तिकासूनवे नमः
ॐ घोररूपाय नमः।
ॐ यं रः अनादिशक्तिधाम्ने सर्वात्मने करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः
ॐ नारसिंहाय नमः
ॐ ह्रीं विद्यास्वरूपायै स्वाहा मे पातु नाभिकाम्। (स्वरूप: विद्यास्वरूपा | लाभ: नाभि, मणिपूर चक्र और नाद के उद्गम स्थान 'पश्यन्ती' वाक् की रक्षा | अर्थ: विद्यास्वरूपा मेरी नाभि की रक्षा करें) 8
ॐ कामाद्याय नमः