शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ कृष्णकान्तायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसहस्रनाम जप मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो कृष्ण की कान्ता (पत्नी/प्रेयसी) हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
पति-पत्नी के मध्य सामंजस्य
विस्तृत लाभ
पति-पत्नी के मध्य सामंजस्य।
जप काल
तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;
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मनोजवम् मारुततुल्यवेगम् जितेन्द्रियम् बुद्धिमताम् वरिष्ठम्। वातात्मजम् वानरयूथमुख्यम् श्रीरामदूतम् शरणम् प्रपद्ये॥
ॐ विश्वतोमुखाय नमः
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे। सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ 17
गोपनीयमिदं देवि ममात्मासि मणिर्यथा। धन्यं यशस्यमायुष्यं श्रीकरं पुष्टिवर्धनम्॥
ॐ कंसप्रध्वंसकारिणे नमः
ॐ त्रयीमूर्तये नमः