ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

श्री राधा मंत्र

ॐ उदरं सुबलस्वसा पातु।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकाररक्षा कवच मंत्र;
स्वरूपसुबलस्वसा
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

सुबल की बहन (राधा) मेरे उदर की रक्षा करें।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

अंग: उदर (पेट) की रक्षा

विस्तृत लाभ

अंग: उदर (पेट) की रक्षा।

टिप्पणी

इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।

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रक्षत्वसौ माध्वनि यज्ञकल्पः स्वदंष्ट्रयोद्धृतधरो वराहः

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ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्‍डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी‍ का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भू‍त, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।

ॐ पुण्यश्लोकाय नमः

ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयम् कारी वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा।

ॐ धीरोदात्तगुणोत्तराय नमः