श्री राधा मंत्र
ॐ कुलकामिन्यै नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
कुल (परंपरा) की मुख्य अधिष्ठात्री देवी, जो सभी इच्छाएं जानती हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
सभी सात्विक इच्छाओं की पूर्ति और कुल (परिवार) की रक्षा
विस्तृत लाभ
सभी सात्विक इच्छाओं की पूर्ति और कुल (परिवार) की रक्षा।
जप काल
नित्य उपासना, शिवरात्रि या अमावस्या की मध्यरात्रि में रुद्राक्ष या मुण्ड माला से जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ज्वालाचक्राय स्वाहा – शिरसे स्वाहा
ॐ शास्त्रे नमः
सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥ 17
व्यक्ताव्यक्तगिरः सर्वे वेदाद्या व्याहरन्ति याम्। सर्वकामदुघा धेनुः सा मां पातु सरस्वती॥ सौः देवीं वाचमजनयन्त देवास्ता विश्वरूपाः पशवो वदन्ति। सा नो मन्द्रेषमूर्जं दुहाना धेनुर्वागस्मानुपसुष्टुतैतु॥
नैऋत्ये क्रोध भैरवाय नमः नैऋत्ये मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
यस्य त्वेतानि चत्वारि वानरेन्द्र यथा तव। धृतिर्दृष्टिर्मतिर्दाक्ष्यं स कर्मसु न सीदति॥