शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ ओङ्काररूपिण्यै देव्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसहस्रनाम जप मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो प्रणव (ॐकार) स्वरूपा देवी हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
नाद-ब्रह्म की अनुभूति
विस्तृत लाभ
नाद-ब्रह्म की अनुभूति।
जप काल
तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
जो सर्वव्यापक भगवान विष्णु के ही साक्षात् अवतार हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: सर्व-कल्याण) 19।
ॐ आनन्दाय नमः
ॐ हृदयं योगिसाध्यश्च निवासं पातु मे हरिः
ॐ उन्मूलने कर्मठाय नमः।
ॐ नमस्ते गणपतये ॥ त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि ॥ त्वमेव केवलं कर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं धर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं हर्ताऽसि ॥ त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि ॥ त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम् ॥
ॐ क्षेत्रज्ञाय नमः