शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ पञ्चवक्त्राय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपपंचमुखी स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अहिरावण वध हेतु पंचमुखी (पांच मुखों वाला) स्वरूप धारण करने वाले को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ स्कन्दाय नमः
ॐ कीर्तिदायै नमः
ॐ ह्रीं क्लीं वाण्यै स्वाहेति मम पृष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: वाणी | लाभ: पीठ और मेरुदंड की रक्षा | अर्थ: वाणी मेरी पीठ की सदा रक्षा करें) 8
ॐ महाज्वालाय नमः
करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसंवापराधं। विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो॥
ॐ पारिजातापहारकाय नमः