श्री राधा मंत्र
ॐ कीर्तिदायै नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो कीर्ति प्रदान करती हैं (अथवा कीर्तिदा की पुत्री)।
इस मंत्र से क्या होगा?
यश और सुकीर्ति का फैलाव
विस्तृत लाभ
यश और सुकीर्ति का फैलाव।
जप काल
तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीधराय नमः
ॐ अनीश्वराय नमः
ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-वीर-वीराय सर्वदुःख निवारणाय ग्रहमण्डल सर्वभूतमण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन भूत-ज्वर एकाहिक-ज्वर द्वयाहिक-ज्वर त्र्याहिक-ज्वर चातुर्थिक-ज्वर संताप-ज्वर विषम-ज्वर ताप-ज्वर माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्मराक्षस भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा।
ॐ नन्दिने नमः
श्रीं वाग्देवतायै स्वाहा भालं मे सर्वदाऽवतु। (स्वरूप: वाग्देवता | लाभ: मस्तक, आज्ञा चक्र व विचार-केंद्र की रक्षा | अर्थ: श्रीं बीज रूपी वाग्देवता मेरे ललाट की सदा रक्षा करें) 8
ॐ जितामित्राय नमः