शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ पूर्वां दिशं कृष्णरता पातु।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकाररक्षा कवच मंत्र;
स्वरूपकृष्णरता
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
कृष्ण में रत रहने वाली देवी पूर्व दिशा में मेरी रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंग: पूर्व दिशा की रक्षा
विस्तृत लाभ
अंग: पूर्व दिशा की रक्षा।
टिप्पणी
इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ क्षत्रियाय नमः।
ॐ ह्रां सर्वशक्तिधाम्ने ईशानात्मने अङ्गुष्ठाभ्यां नमः
ॐ सौम्याय नमः
ॐ रक्तमालाविभूषाय नमः
ॐ सुभाषिण्यै नमः
दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिः स्फटिकमणिनिभैरक्षमालान्दधाना। हस्तेनैकेन पद्मं सितमपि च शुकं पुस्तकं चापरेण॥ भासा कुन्देन्दुशङ्खस्फटिकमणिनिभा भासमानाऽसमाना। सा मे वाग्देवतेयं निवसतु वदने सर्वदा सुप्रसन्ना॥