ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

राधारानी गायत्री मंत्र

ॐ वृषभानुजायै विद्महे कृष्णप्रियायै धीमहि। तन्नो राधा प्रचोदयात्॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारगायत्री मंत्र
स्वरूपवृषभानुनंदिनी / कृष्णप्रिया राधा
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

हम वृषभानु पुत्री को जानते हैं, उन कृष्ण-प्रिया का ध्यान करते हैं; वह राधा हमारी बुद्धि को परम सत्य और भक्ति के मार्ग पर प्रेरित करें।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

बुद्धि की अज्ञानता का नाश, कृष्ण-प्रेम की प्राप्ति, वैवाहिक सुख और आकर्षण शक्ति में वृद्धि

विस्तृत लाभ

बुद्धि की अज्ञानता का नाश, कृष्ण-प्रेम की प्राप्ति, वैवाहिक सुख और आकर्षण शक्ति में वृद्धि 13।

जप काल

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः संध्या) या सायं गोधूलि वेला में।

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