श्री राधा मंत्र
मुनीन्द्रवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणि प्रसन्नवक्त्रपङ्कजे निकुञ्जभूविलासिनि। व्रजेन्द्रभानुनन्दिनि व्रजेन्द्रसूनुसङ्गते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥ मुनीन्द्र-वन्दिते (ऋषियों द्वारा वंदित)
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे मुनीन्द्रों द्वारा वंदित, त्रिलोकी का शोक हरने वाली, और निकुंज में विलास करने वाली, आप मुझ पर कृपा-कटाक्ष कब करेंगी?
इस मंत्र से क्या होगा?
विधि: नित्य पाठ
विस्तृत लाभ
विधि: नित्य पाठ।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
श्रीं वाग्देवतायै स्वाहा भालं मे सर्वदाऽवतु। (स्वरूप: वाग्देवता | लाभ: मस्तक, आज्ञा चक्र व विचार-केंद्र की रक्षा | अर्थ: श्रीं बीज रूपी वाग्देवता मेरे ललाट की सदा रक्षा करें) 8
ॐ राजेन्द्राय नमः
ॐ करञ्जारण्यवासिन्यै नमः
धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशकं कर्मपाशमोचकं सुशर्मदायकं विभुम्।
ॐ कामदेवाय नमः
ॐ दशबाहवे नमः