ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

श्री राधा मंत्र

ॐ कृपाध्यक्षायै नमः

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारसहस्रनाम जप मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जो ईश्वर की कृपा-वितरण की अध्यक्षा हैं।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

बिना योग्यता के भी भगवान की कृपा मिलना

विस्तृत लाभ

बिना योग्यता के भी भगवान की कृपा मिलना।

जप काल

तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;

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ॐ पुण्यात्मने नमः

ॐ अव्यक्ताय नमः

भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम्। तर्जनं यमदूतानां राम रामेति गर्जनम्॥

व्यक्ताव्यक्तगिरः सर्वे वेदाद्या व्याहरन्ति याम्। सर्वकामदुघा धेनुः सा मां पातु सरस्वती॥ सौः देवीं वाचमजनयन्त देवास्ता विश्वरूपाः पशवो वदन्ति। सा नो मन्द्रेषमूर्जं दुहाना धेनुर्वागस्मानुपसुष्टुतैतु॥

ॐ बालाय नमः।

ख्फ्रेँ ख्फ्रीँ चण्डे चण्डचामुण्डे ह्रीँ हूँ स्त्रीँ छ्रीँ विच्चे घोरे महामदोन्मनि क्लीँ ब्लूँ गुह्येश्वरि ॐ परानिर्वाणे ब्रह्मरूपिणि ॐ फ्रेँ फ्रेँ सिद्धिकरालि आप्यायिनि नवपञ्चचक्रनिलये घोराट्टराविणि कलासहस्रनिवासिनि खँ खँ खँ ह्सौँ फ्रेँ अवर्णेश्वरि प्रकृत्यपर शिवनिर्वाणदे ख्फ्रेँ स्वाहा॥