शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री दुर्गा कवचम (अंग रक्षा मंत्र - 1)
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी। तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारकवच मंत्र |
स्वरूपनवदुर्गा
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
शरीर के चारों ओर अभेद्य आध्यात्मिक कवच का निर्माण
विस्तृत लाभ
शरीर के चारों ओर अभेद्य आध्यात्मिक कवच का निर्माण 53।
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