शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ रक्तमालाविभूषाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपउग्र शृंगार
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो रक्त-वर्ण (लाल) पुष्पों की मालाओं से विभूषित हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मंगल ग्रह के दोषों (मांगलिक दोष) की तीव्र शांति
02
रक्त-संबंधित रोगों से मुक्ति
विस्तृत लाभ
मंगल ग्रह के दोषों (मांगलिक दोष) की तीव्र शांति; रक्त-संबंधित रोगों से मुक्ति।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ स्वाहायै नमः
अङ्गं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती भृङ्गाङ्गनेव मुकुलाभरणं तमालम्। अङ्गीकृताखिलविभूतिरपाङ्गलीला माङ्गल्यदास्तु मम मङ्गलदेवतायाः॥
ॐ भ्रूयुगं शशिशोभना पातु।
आवत हियँ हरषीं नहिं नैनन्हि नहिं सनेह। तुलसी तहाँ न जाइये कंचन बरसे मेह॥
ॐ सुमनोहराय नमः
भद्रकाल्यै नमो नित्यं सरस्वत्यै नमो नमः। वेदवेदाङ्गवेदान्तविद्यास्थानेभ्य एव च॥