शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ रत्नगर्भायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनके गर्भ में बहुमूल्य रत्न समाहित हैं, उन्हें नमन 14।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
अयं यः सृञ्जये पुरो दैववाते समिध्यते । द्युमाँ अमित्रदम्भनः ॥
ॐ सर्वयज्ञाधिपाय नमः
ॐ कबन्धासनधारिण्यै नमः
ॐ दुर्धर्षाय नमः
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥
ॐ दुर्ज्ञेयाय नमः