शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
महालक्ष्मी मूल मंत्र (दशाक्षरी संपुटित)
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे कमल पर विराजने वाली महालक्ष्मी! मुझ पर प्रसन्न हों, आपको नमन है 28।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
पीढ़ियों तक स्थिर संपत्ति, ऋण-मुक्ति
विस्तृत लाभ
पीढ़ियों तक स्थिर संपत्ति, ऋण-मुक्ति।
जप काल
72 दिनों में 1.25 लाख जप का विधान 25।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सुरूपाय नमः
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।
भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर अरु नारि। तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि॥
गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम् । उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम् ॥
ॐ भायभूतापिशचघ्नाय नमः
ॐ कृष्णानन्दप्रदायिन्यै नमः