शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ सुकीर्तये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपश्रेष्ठ कीर्ति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनकी यश और कीर्ति तीनों लोकों में सिद्धों द्वारा गाई जाती है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
यश
विस्तृत लाभ
यश
जप काल
नित्य
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सर्वमन्त्रस्वरूपवते नमः
ॐ अक्षयफलप्रदाय नमः
ॐ हरिण्यै नमः
पाशाङ्कुशौ दन्त जम्बू दधानः स्फटिकप्रभः । रक्तांशुकः गणपतिः मुदे स्याद् ऋणमोचकः ॥
ॐ साधकप्राणायै नमः
ॐ शृतं मे मा प्रहासीः अनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधामि ऋतं वदिष्यामि सत्यं वदिष्यामि। तन्मामवतु तद्वक्तारमवतु अवतु मामवतु वक्तारमवतु वक्तारम्। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥