शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ उन्मत्ताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपप्रेम-उन्मत्त
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो अपने भक्तों के प्रेम में उन्मत्त (सुध-बुध खोने वाले) हो जाते हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
भगवान के प्रति प्रेमाभक्ति की सर्वोच्च अवस्था
02
भाव-समाधि की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
भगवान के प्रति प्रेमाभक्ति की सर्वोच्च अवस्था; भाव-समाधि की प्राप्ति।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
नमो भगवते फट् भैरवाय... आकर्षय-2 आवेशय-2 मोहय-2 भ्रामय-2... ह्रां ह्रीं त्रिपुरतांडवाय अष्टभैरवाय भाषय-2 स्वाहा।
ॐ मृत्युघ्न्यै नमः
ॐ अमृत्यवे नमः
ॐ कोमलाङ्ग्यै नमः
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये ब्रह्माण्डातीतपरमपुरुषः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः