शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ यमुनावेगसंहारिणे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपप्रकृति-नियंता
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
यमुना नदी के तीव्र वेग को शान्त (संहार) करने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
प्राकृतिक आपदा से रक्षा
विस्तृत लाभ
प्राकृतिक आपदा से रक्षा
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सहस्रार हुं फट् नमः
ॐ अहं रुद्रेभिर्वसुभिश्चराम्यहमादित्यैरुत विश्वदेवैः। अहं मित्रावरुणोभा बिभर्म्यहमिन्द्राग्नी अहमश्विनोभा॥
ॐ कर्णौ गोपेन्द्रनन्दिनी पातु।
त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव
ॐ नमो भगवते संहार भैरवाय भूत प्रेत पिशाच ब्रह्म राक्षसान् उच्चाटय उच्चाटय संहारय संहारय सर्व भय छेदनं कुरु कुरु स्वाहा।
ॐ परात्पराय नमः