ज्येष्ठा लक्ष्मी मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ज्येष्ठ लक्ष्मी स्वयम्भुवे ह्रीं ज्येष्ठायै नमः।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
ऐं, ह्रीं, श्रीं बीज शक्तियों से युक्त, स्वयंभू ज्येष्ठा लक्ष्मी को मेरा नमन है।
इस मंत्र से क्या होगा?
संपत्ति का संरक्षण और नेतृत्व की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
संपत्ति का संरक्षण और नेतृत्व की प्राप्ति।
जप काल
स्थिर लग्न में जप 25।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
हरिद्रां चतुर्बाहुं हरिद्रावदनं प्रभुम् । पाशाङ्कुशधरं देवं मोदकं दन्तमेव च ॥ भक्ताभयप्रदातारं वन्दे विघ्नविनाशनम् ॥
ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः।
ॐ श्रीं ह्रीं ब्राह्म्यै स्वाहेति दन्तपङ्क्तीः सदाऽवतु। (स्वरूप: ब्राह्मी | लाभ: दाँतों और स्पष्ट वाचन-स्थान की रक्षा | अर्थ: ब्राह्मी देवी मेरी दंत-पंक्तियों की सदा रक्षा करें) 8
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये ब्रह्माण्डातीतपरमपुरुषः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ दुर्गभामायै नमः
ॐ सदाशिवाय नमः