ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

श्रीराम मंत्र

ॐ सर्वावगुणवर्जिताय नमः

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारनाम-मंत्र (Nama-Mantras)।
स्वरूपदोष-रहित
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जो काम, क्रोध, लोभ आदि समस्त सांसारिक दोषों और अवगुणों से सर्वथा मुक्त हैं 35।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

इन 108 मंत्रों का शृंखलाबद्ध पाठ शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है

02

दरिद्रता व नकारात्मकता का नाश करता है

03

और अंततः वैकुण्ठ की प्राप्ति सुनिश्चित करता है

विस्तृत लाभ

इन 108 मंत्रों का शृंखलाबद्ध पाठ शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है; दरिद्रता व नकारात्मकता का नाश करता है; और अंततः वैकुण्ठ की प्राप्ति सुनिश्चित करता है।

जप काल

नित्य प्रातः या गोधूलि वेला में, तुलसी या रुद्राक्ष की माला से अनुष्ठानिक पाठ।

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अन्य देवताओं के मंत्र

प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र

ॐ ह्रीं जिह्वाग्रवासिन्यै स्वाहाऽग्निदिशि रक्षतु। (अर्थ: जिह्वाग्र में बसने वाली देवी आग्नेय कोण में रक्षा करें) 8

ॐ श्रीमती नेत्रयुगलं पातु।

ॐ कुलीनार्तिनाशिन्यै नमः

ॐ ह्रीं बटुकाय मम ग्रह बाधा निवारणं कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।

ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै।

ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-वीर-वीराय सर्वदुःख निवारणाय ग्रहमण्डल सर्वभूतमण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन भूत-ज्वर एकाहिक-ज्वर द्वयाहिक-ज्वर त्र्याहिक-ज्वर चातुर्थिक-ज्वर संताप-ज्वर विषम-ज्वर ताप-ज्वर माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्मराक्षस भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा।