शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ नारायणाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपनारायण
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जल (नार) में अयन (निवास) करने वाले नारायण स्वरूप को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
जल-भय नाश
विस्तृत लाभ
जल-भय नाश
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ स्थिराय नमः
ॐ विद्युन्मालायै नमः
ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्मी मम गृहे धनं पूरय पूरय चिंतायै दूरय दूरय स्वाहा।
ॐ नृं नृं नृं नरसिंहाय नमः
ॐ कुमारगुरुवन्द्याय नमः
मुनीन्द्रवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणि प्रसन्नवक्त्रपङ्कजे निकुञ्जभूविलासिनि। व्रजेन्द्रभानुनन्दिनि व्रजेन्द्रसूनुसङ्गते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥ मुनीन्द्र-वन्दिते (ऋषियों द्वारा वंदित)