शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ पञ्चबाणधराय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपकामदेव स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो कामदेव के पांच बाणों को भी अपने नियंत्रण में धारण करते हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
काम-वासना पर पूर्ण नियंत्रण
02
काम-ऊर्जा का ओजस (आध्यात्मिक तेज) में रूपांतरण
विस्तृत लाभ
काम-वासना पर पूर्ण नियंत्रण; काम-ऊर्जा का ओजस (आध्यात्मिक तेज) में रूपांतरण।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सर्वदेवेषाय नमः।
ॐ मायामारीचहन्त्रे नमः
गजेन्द्रवदनं साक्षाच्चलकर्ण सुचामरम् । हेमवर्णं चतुर्बाहुं पाशाङ्कुशधरं वरम् ॥ स्वदन्तं दक्षिणे हस्ते सव्ये त्वाम्रफलं तथा । पुष्करे मोदकं चैव धारयन्तमनुस्मरेत् ॥
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं सर्व मङ्गलाय पिङ्गलाय ॐ नमः
ॐ अहं रुद्रेभिर्वसुभिश्चराम्यहमादित्यैरुत विश्वदेवैः। अहं मित्रावरुणोभा बिभर्म्यहमिन्द्राग्नी अहमश्विनोभा॥
ॐ भकाररूपाय नमः