शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ पुरुषाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारवैखानस पंच-मूर्ति मंत्र
स्वरूपधर्म और जीवन-सिद्धांत स्वरूप (कौतुक बेर)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
मैं जीवन के मूल सिद्धांत स्वरूप परम पुरुष को नमन करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
जीवन में धर्म की स्थापना और शुद्ध चेतना की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
जीवन में धर्म की स्थापना और शुद्ध चेतना की प्राप्ति 38।
जप काल
वैखानस मंदिर परंपरा में नित्य अर्चना 38।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ एकदन्ताय हुं
ॐ सृष्टिमयास्वरूपाय नमः।
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।
ॐ रामभद्राय नमः
ॐ नवदुर्गायै नमः ॐ महाकाल्यै नमः ॐ ब्रह्माविष्णुशिवात्मिकायै नमः।
तव करकमलवरे नखमद्भुतशृंगं दलितहिरण्यकशिपुतनुभृंगम्। केशव धृतनरहरिरूप जय जगदीश हरे॥