स्वर्णाकर्षण भैरव महामंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं आपदुद्धारणाय ह्रां ह्रीं ह्रूं अजामिलबद्धाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षणभैरवाय मम दारिद्र्य विद्वेषणाय महाभैरवाय नमः श्रीं ह्रीं ऐं।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
आपत्तियों का नाश करने वाले, संपूर्ण लोक के ईश्वर स्वर्णाकर्षण भैरव को नमस्कार है। वे मेरी दरिद्रता का नाश करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
भारी कर्ज से मुक्ति, स्वर्ण-ऐश्वर्य की प्राप्ति, दरिद्रता का समूल नाश
विस्तृत लाभ
भारी कर्ज से मुक्ति, स्वर्ण-ऐश्वर्य की प्राप्ति, दरिद्रता का समूल नाश 4।
जप काल
शुक्रवार या भैरवाष्टमी को, स्वर्ण या स्फटिक यंत्र के सम्मुख 4।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ करदायै नमः
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं धन लक्ष्म्यै नमः।
ॐ दृप्ताय नमः
ॐ नमः शिवाय
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।
ॐ शर्वाण्यै नमः