शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
ॐ अक्षराय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपअविनाशी ब्रह्म
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनका कभी क्षरण नहीं होता, जो ओंकार (अक्षर) स्वरूप हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
स्थिरता
विस्तृत लाभ
स्थिरता
जप काल
नित्य
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ शाश्वताय नमः
ॐ कालानलसमद्युत्यै नमः
अक्षमालां कुठारं च रत्नपात्रं स्वदन्तकम् । धत्ते करैर्विघ्नराजो ढुण्ढिनाम मुदेऽस्तु नः ॥
ॐ क्षत्रियाय नमः।
देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम्। रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥
दुर्गे देवि नमस्तुभ्यं सर्वकामार्थसाधिके। मम सिद्धिमसिद्धिं वा स्वप्ने सर्वं प्रदर्शय॥