शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कालभैरवाष्टकम् - मंत्र 2
भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम्।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारस्तोत्र-मंत्र
स्वरूपकाल भैरव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी, शिव स्वरूप नीलकंठ भैरव का मैं भजन करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
संसार-सागर से मुक्ति और ईप्सित (इच्छित) अर्थ की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
संसार-सागर से मुक्ति और ईप्सित (इच्छित) अर्थ की प्राप्ति।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये विस्तीर्णेन्द्रियात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ विभवे नमः
रामोऽद्रिकूटेष्वथ विप्रवासे सानुजोऽव्याद् भरताग्रजो माम्
कल्हारांबुज बीजपूरक गदा दन्तेक्षु बाणैः सदा बिभ्राणो मणिकुम्भ शालिकलशौ पाशं च चक्रान्वितम् । गौराङ्ग्या रुचिराविन्दकरया देव्या सदा संयुतः शोणाङ्कुश शुभमातनोतु भजतामुद्दण्डविघ्नेश्वरः ॥
ॐ ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः।
ॐ कुमतिघ्न्यै नमः