माँ सरस्वती मंत्र
मृणालवालवल्लरी तरङ्गरङ्गदोर्लते लताग्रलास्यलोलनीललोचनावलोकने। ललल्लुलन्मलन्मनोज्ञमुग्धमोहनाश्रिते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
कमलनाल के समान भुजाओं वाली, चंचल नीले नेत्रों वाली और मुग्धकारी मोहन (कृष्ण) की आश्रिता हे राधे, मेरी ओर कृपादृष्टि करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
लाभ: चंचल मन की स्थिरता
विस्तृत लाभ
लाभ: चंचल मन की स्थिरता।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
वीणां कल्पलतां अरिं च वरदं दक्षे विदत्ते करैः वामे तामरसं च रत्नकलशं सन्मञ्जरीं चाभयम् । शुण्डादण्ड लसन्मृगेन्द्रवदनः शङ्खेन्दुगौरः शुभो दीव्यद्रत्ननिभांशुकः गणपतिः पायादपायात्स नः ॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये ब्रह्मानन्दामृतं तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ सरस्वत्यै नमः
ॐ गरुडध्वजाय नमः
ॐ सर्वात्मने नमः
ॐ महाबलाय वीराय चिरंजीविने उद्दते। हारिणे वज्र देहाय चोलंग्घितमहाव्यये॥