शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
ॐ नखास्त्राय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपवज्रनख
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनके नख ही उनके सबसे बड़े अस्त्र हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
बिना किसी बाहरी हथियार के स्वयं का एक प्राकृतिक रक्षा-कवच निर्मित होना
विस्तृत लाभ
बिना किसी बाहरी हथियार के स्वयं का एक प्राकृतिक रक्षा-कवच निर्मित होना।
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ईशान्यां संहार भैरवाय नमः ईशाने मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
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ॐ ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं नमः।
ॐ ब्रह्मण्याय नमः
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
ॐ अहं रुद्रेभिर्वसुभिश्चराम्यहमादित्यैरुत विश्वदेवैः। अहं मित्रावरुणोभा बिभर्म्यहमिन्द्राग्नी अहमश्विनोभा॥