माँ सरस्वती मंत्र
नित्यलीलाप्रवेशं च ददाति श्रीव्रजाधिपः। अतः परतरं प्रार्थ्यं वैष्णवानां न विद्यते॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
तत्पश्चात व्रज के अधिपति (कृष्ण) उसे अपनी नित्यलीला में प्रवेश देते हैं। सच्चे वैष्णवों के लिए इससे परे मांगने योग्य और कुछ भी नहीं है।
इस मंत्र से क्या होगा?
लाभ: गोलोक की नित्यलीला में प्रवेश
विस्तृत लाभ
लाभ: गोलोक की नित्यलीला में प्रवेश।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐ प्रहर्त्रे नमः
ॐ शान्ताय नमः
या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः। श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्॥ 18
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये अष्टदिक्पालाः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ कालनेमिप्रमथनाय नमः