शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
ॐ प्रसन्नात्मने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
स्वरूपप्रसन्न-चित्त
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सदैव प्रसन्न, मुस्कुराते हुए और आनंदित रहने वाले भगवान को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कूजन्नूपुररञ्जन्यै नमः
ॐ विष्णवे नमः (नारायण कवच हृदयादि न्यास)
ॐ मनोन्मन्यै नमः
ऐमित्येकाक्षरो मन्त्रो मम कण्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: एकाक्षरी बीज | लाभ: कंठ, स्वर-तंत्र और विशुद्धि चक्र की रक्षा, संगीतकारों के लिए अति उत्तम | अर्थ: 'ऐं' रूपी एकाक्षर मन्त्र मेरे कंठ की सदा रक्षा करे) 8
ॐ वसुदेवात्मजाय नमः
ॐ महादेवाय नमः