शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
ॐ साक्षिणे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपसाक्षी भाव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो ब्रह्मांड के सभी कर्मों को एक तटस्थ साक्षी की तरह देखते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वैराग्य
विस्तृत लाभ
वैराग्य
जप काल
ध्यान
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
देवि प्रसीद परिपालय नोऽरिभीतेर्नित्यं यथासुरवधादधुनैव सद्यः। पापानि सर्वजगतां प्रशमं नयाशु उत्पातपाकजनितांश्च महोपसर्गान्॥ 18
ॐ जलशायिने नमः
ॐ जगत्पालाय नमः
ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम् । ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत आ नः शृण्वन्नूतिभिः सीद सादनम् ॥
ॐ विराट्सुताय नमः
ॐ रमायै नमः