शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
ॐ साक्षिणे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपसाक्षी भाव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो ब्रह्मांड के सभी कर्मों को एक तटस्थ साक्षी की तरह देखते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वैराग्य
विस्तृत लाभ
वैराग्य
जप काल
ध्यान
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा ॥
यं ब्रह्मा वरुणेन्द्ररुद्रमरुतः स्तुन्वन्ति दिव्यैः स्तवैः वेदैः साङ्गपदक्रमोपनिषदैः गायन्ति यं सामगाः । ध्यानावस्थिततद्गतेन मनसा पश्यन्ति यं योगिनो यस्यान्तं न विदुः सुरासुरगणा देवाय तस्मै नमः ॥
आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्। लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्॥
ॐ दुर्गभीमायै नमः
ॐ मत्स्यरूपाय नमः
ॐ रत्नकुण्डलदीप्तिमते नमः