शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
ॐ शचीनाथचतुर्वक्त्रदेवदैत्याभिवन्दिताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपसर्व-पूज्य
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
इंद्र, ब्रह्मा (चतुर्वक्त्र), देव और दैत्यों द्वारा वंदित देव को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मित्रों और शत्रुओं, दोनों से सम्मान प्राप्त होना
विस्तृत लाभ
मित्रों और शत्रुओं, दोनों से सम्मान प्राप्त होना।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ दारिद्र्यध्वंसिन्यै नमः ॐ देवलक्ष्म्यै नमः ॐ सर्वोपद्रवनिवारिण्यै नमः।
ॐ ब्रह्मवन्दिताय नमः
ॐ शान्ताय नमः
ॐ हंसवाहिन्यै नमः
ॐ मालोल नरसिंहाय नमः
ख्फ्रेँ ख्फ्रीँ चण्डे चण्डचामुण्डे ह्रीँ हूँ स्त्रीँ छ्रीँ विच्चे घोरे महामदोन्मनि क्लीँ ब्लूँ गुह्येश्वरि ॐ परानिर्वाणे ब्रह्मरूपिणि ॐ फ्रेँ फ्रेँ सिद्धिकरालि आप्यायिनि नवपञ्चचक्रनिलये घोराट्टराविणि कलासहस्रनिवासिनि खँ खँ खँ ह्सौँ फ्रेँ अवर्णेश्वरि प्रकृत्यपर शिवनिर्वाणदे ख्फ्रेँ स्वाहा॥