शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
ॐ उदरं सुबलस्वसा पातु।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकाररक्षा कवच मंत्र;
स्वरूपसुबलस्वसा
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सुबल की बहन (राधा) मेरे उदर की रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंग: उदर (पेट) की रक्षा
विस्तृत लाभ
अंग: उदर (पेट) की रक्षा।
टिप्पणी
इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।
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ॐ हरिद्वर्णाय नमः
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।
ॐ मायायै नमः।
ॐ ज्ञानदीपाय नमः
ॐ कामपाशविमोचिन्यै नमः
ॐ शूराय नमः