शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
ॐ वज्रदेहाय वज्राय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपदेह रक्षा
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
वज्र के समान शरीर वाले को नमस्कार है। (भौतिक आघातों से पूर्ण सुरक्षा)।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ हुं हुं शत्रुस्तम्भनाय हुं हुं ॐ फट्
ॐ जितामित्राय नमः
ॐ पुरुषाय नमः
ॐ श्रीं ह्रीं चामुण्डायै नमः
ॐ नागाशनरथस्थिताय नमः
ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भूत, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।