माँ सरस्वती मंत्र
वसुन्धरे श्री वसुधे वसुदोग्ध्रे कृपामयि! त्वत्कुक्षिगतं सर्वस्वं शीघ्रं मे त्वं प्रदर्शय॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे वसुंधरे, हे श्री, हे कृपामयी! आपके गर्भ (कुक्षि) में जो भी सर्वस्व है, वह मुझे शीघ्र प्रदर्शित करें 14।
इस मंत्र से क्या होगा?
पृथ्वी या भूमि में छिपे हुए रत्नों/संपत्ति की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
पृथ्वी या भूमि में छिपे हुए रत्नों/संपत्ति की प्राप्ति।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ जगद्गुरवे नमः
ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भूत, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।
ॐ नृं नृं नृं नरसिंहाय नमः
ॐ महापातकनाशिन्यै नमः
ॐ अव्ययाय नमः
ॐ महते नमः