शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नारद पुराणोक्त अमोघ माला-मंत्र (आंशिक स्वरूप)
यँ यँ हनुमते फल फक्रिया हौत धग् धग् आयुरस्व प ख हेति फट्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारतांत्रिक माला मंत्र (Mala Mantra)
स्वरूपउग्र वीर हनुमान
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
(यह तांत्रिक बीजाक्षरों का समूह है, जिसका कोई लौकिक शाब्दिक अर्थ नहीं होता; यह अग्नि 'धग्' और वायु 'यँ' तत्त्व को जागृत करने वाला नाद है।)
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
यह युद्ध, शास्त्रार्थ, और भयंकर व्याधियों में अमोघ विजय प्रदान करता है
02
धन, धान्य और अतुलनीय यश की प्राप्ति होती है
विस्तृत लाभ
यह युद्ध, शास्त्रार्थ, और भयंकर व्याधियों में अमोघ विजय प्रदान करता है। धन, धान्य और अतुलनीय यश की प्राप्ति होती है 7।
जप काल
अस्त्र बीज (फट्) से युक्त होने के कारण इसे गुरु-निर्देशन में रक्षा-कवच के रूप में जपा जाता है।
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