शिव मंत्र
इतीदमद्भुतस्तवं निशम्य भानुनन्दिनी करोतु सन्ततं जनं कृपाकटाक्षभाजनम्। भवेत्तदैव सञ्चितत्रिरूपकर्मनाशनं लभेत्तदा व्रजेन्द्रसूनुमण्डलप्रवेशनम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
(फलश्रुति) हे भानुनन्दिनी! इस अद्भुत स्तुति को सुनकर आप अपने दास को सदा के लिए कृपा-कटाक्ष का पात्र बना लें, जिससे मेरे प्रारब्ध कर्म नष्ट हों और मैं कृष्ण के नित्य मण्डल में प्रवेश पाऊँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
लाभ: संचित कर्मों का नाश और ब्रजमंडल में प्रवेश
विस्तृत लाभ
लाभ: संचित कर्मों का नाश और ब्रजमंडल में प्रवेश।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ विराधवधपण्डिताय नमः
ॐ स्वाँ हृदयाय नमः, ॐ ह्रीँ शिरसे स्वाहा, ॐ क्लीँ शिखायै वषट्, ॐ ऐँ कवचाय हुं
ॐ ह्रीं बटुकाय मम अकाल मृत्यु निवारय निवारय बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।
ॐ माधव्यै नमः
कवचस्यास्य जापी तु ब्रह्मज्ञानं च विन्दति। इत्येतदुक्तं कवचं मया हैहयविद्विषः॥
ॐ महाबलाय वीराय चिरंजीविने उद्दते। हारिणे वज्र देहाय चोलंग्घितमहाव्यये॥