शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
सूक्ष्मातिसूक्ष्मं कलिलस्य मध्ये विश्वस्य स्रष्टारमनेकरूपम्
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सूक्ष्म से भी सूक्ष्म है और अनेक रूपों में विश्व का स्रष्टा है, उसे जानकर शांति मिलती है
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
श्रीं वाग्देवतायै स्वाहा भालं मे सर्वदाऽवतु। (स्वरूप: वाग्देवता | लाभ: मस्तक, आज्ञा चक्र व विचार-केंद्र की रक्षा | अर्थ: श्रीं बीज रूपी वाग्देवता मेरे ललाट की सदा रक्षा करें) 8
ॐ पुण्यचारित्रकीर्तनाय नमः
झ्म्र्यूं (Jhmryūm)
क्रीं क्रीं ह्रीं क्रूरभैरव प्रसीद-प्रसीद स्वाहा।
ॐ वेदवेद्याय नमः
ॐ वश्याद्यष्टक्रियाप्रदाय नमः