शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ त्रिविक्रमाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपविष्णु स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिन्होंने वामन रूप में तीन पगों से ब्रह्मांड नापा था, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
रुके हुए व्यापार में विस्तार और कार्यक्षेत्र में तीव्र पदोन्नति
विस्तृत लाभ
रुके हुए व्यापार में विस्तार और कार्यक्षेत्र में तीव्र पदोन्नति।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ नमो भगवते संहार भैरवाय भूत प्रेत पिशाच ब्रह्म राक्षसान् उच्चाटय उच्चाटय संहारय संहारय सर्व भय छेदनं कुरु कुरु स्वाहा।
ॐ करप्रियायै नमः
निराकारमोंकारमूलं तुरीयं। गिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम्॥
ॐ मोहमन्त्रिण्यै नमः
ॐ नन्दिन्यै नमः
वेदान्तार्थस्वरूपाय वेदान्तार्थविधायिने । वेदान्तार्थविदे नित्यं विदिताय नमो नमः ॥