शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
यदा तमस्तन्न दिवा न रात्रिर्न सन्नचासच्छिव एव केवलः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जब कोई अंधकार नहीं था, न दिन था न रात, न सत् था न असत्, तब केवल एक 'शिव' ही थे
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
श्रीं वाग्देवतायै स्वाहा भालं मे सर्वदाऽवतु। (स्वरूप: वाग्देवता | लाभ: मस्तक, आज्ञा चक्र व विचार-केंद्र की रक्षा | अर्थ: श्रीं बीज रूपी वाग्देवता मेरे ललाट की सदा रक्षा करें) 8
ॐ कूजन्नूपुररञ्जन्यै नमः
ॐ नमो भगवते पंचवदनाय पूर्व कपि मुखे। सकल शत्रु संहारणाय स्वाहा॥
ॐ नानारूपधराय नमः
ॐ मङ्गलाय नमः
ॐ कमलाकरतोषितायै नमः