शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ नानारूपधराय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपबहुरूपी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो समय-समय पर मत्स्य, कूर्म आदि अनेक रूप धारण करते हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता (Adaptability) का विकास
विस्तृत लाभ
परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता (Adaptability) का विकास।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ब्रह्मवन्दिताय नमः
ॐ जानकीवल्लभाय नमः
ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-वीर-वीराय सर्वदुःख निवारणाय ग्रहमण्डल सर्वभूतमण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन भूत-ज्वर एकाहिक-ज्वर द्वयाहिक-ज्वर त्र्याहिक-ज्वर चातुर्थिक-ज्वर संताप-ज्वर विषम-ज्वर ताप-ज्वर माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्मराक्षस भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा।
ॐ शिवाय नमः
ॐ दामोदराय विद्महे रुक्मिणीवल्लभाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात् ॥
ॐ महामात्रे नमः