शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ जगन्नाथाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
समस्त जगत के एकमात्र नाथ
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
विश्वव्यापी सम्मान और प्रसिद्धि
विस्तृत लाभ
विश्वव्यापी सम्मान और प्रसिद्धि 23
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा शिरो मे पातु सर्वतः। (स्वरूप: ह्रीं-स्वरूपा सरस्वती | लाभ: मस्तिष्क और सहस्रार चक्र की सभी दिशाओं से रक्षा | अर्थ: ह्रीं बीज रूपी सरस्वती मेरे सिर की सब ओर से रक्षा करें) 8
ॐ चित्रकूटसमाश्रयाय नमः
सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम्। सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥
ॐ श्रीराधा मे शिरः पातु।
कृष्णाय वासुदेवाय देवकीनन्दनाय च । नन्दगोपकुमाराय गोविन्दाय नमो नमः ॥
ॐ परमडम्भाय नमः