शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ जलशायिने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपजलशायी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
ब्रह्मांडीय शीतल जल में निवास करने वाले को नमन।
जप काल
अग्नि का अत्यधिक भय होने पर
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अणिमादिसिद्धिदात्र्यै नमः
ॐ शचीमाङ्गल्यरक्षकाय नमः
ॐ योषितकामाय नमः।
ॐ ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं नमः।
ॐ सरस्वत्यै च विद्महे ब्रह्मपुत्र्यै च धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
ख्फ्रेँ ख्फ्रीँ चण्डे चण्डचामुण्डे ह्रीँ हूँ स्त्रीँ छ्रीँ विच्चे घोरे महामदोन्मनि क्लीँ ब्लूँ गुह्येश्वरि ॐ परानिर्वाणे ब्रह्मरूपिणि ॐ फ्रेँ फ्रेँ सिद्धिकरालि आप्यायिनि नवपञ्चचक्रनिलये घोराट्टराविणि कलासहस्रनिवासिनि खँ खँ खँ ह्सौँ फ्रेँ अवर्णेश्वरि प्रकृत्यपर शिवनिर्वाणदे ख्फ्रेँ स्वाहा॥