शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ जलशायिने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपजलशायी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
ब्रह्मांडीय शीतल जल में निवास करने वाले को नमन।
जप काल
अग्नि का अत्यधिक भय होने पर
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
पाशाङ्कुशौ दन्त जम्बू दधानः स्फटिकप्रभः । रक्तांशुकः गणपतिः मुदे स्याद् ऋणमोचकः ॥
ॐ त्रिलोकपालिन्यै नमः
ॐ शिं रैं स्वतन्त्रशक्तिधाम्ने वामदेवात्मने अनामिकाभ्यां नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये प्रकृतिः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ ह्रीं श्रीं त्र्यक्षरो मन्त्रो नैर्ऋत्यां मे सदाऽवतु। (अर्थ: त्र्यक्षरी मन्त्र नैऋत्य कोण में रक्षा करे) 8
ॐ इन्दुशीतलायै नमः