शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ पूतनाजीवितापहाराय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपपूतना-मोक्ष प्रदाता
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
पूतना राक्षसी के प्राणों का अपहरण करने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
बाल-ग्रह दोष शान्ति
विस्तृत लाभ
बाल-ग्रह दोष शान्ति
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ॐ शरणागतवत्सलाय नमः
ॐ लोकाध्यक्षाय नमः
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥
वेदस्य म आणीस्थः श्रुतं मे मा प्रहासीरनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधाम्यृतं वदिष्यामि सत्यं वदिष्यामि॥
आग्नेये रूरु भैरवाय नमः आग्नेये मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये विशुद्धात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः