शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ प्रतर्दनाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
प्रलय काल में महा-संहारक
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
संचित पापों का समूल विनाश
विस्तृत लाभ
संचित पापों का समूल विनाश 81
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ स्वानन्दं निहिताय नमः।
ॐ शुचये नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये ब्रह्माण्डातीतपरमपुरुषः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।
ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्णदंष्ट्राय धीमहि। तन्नो नारसिंहः प्रचोदयात्॥
ॐ क्रियायै नमः