शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ सूर्यज्योतिषे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपज्योति रूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सूर्य और तारों की ज्योति (प्रकाश) के मूल स्रोत हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
चक्षु-रोगों (आँखों की बीमारियों) का निवारण और मुख पर ओज (Aura) की वृद्धि
विस्तृत लाभ
चक्षु-रोगों (आँखों की बीमारियों) का निवारण और मुख पर ओज (Aura) की वृद्धि।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
आवत हियँ हरषीं नहिं नैनन्हि नहिं सनेह। तुलसी तहाँ न जाइये कंचन बरसे मेह॥
ॐ ब्रह्मचारिणे नमः
ॐ यश्छन्दसामृषभो विश्वरूपः। छन्दोभ्योऽध्यमृतात्सम्बभूव। स मेन्द्रो मेधया स्पृणोतु। अमृतस्य देव धारणो भूयासम्॥
ॐ भवानन्दप्रदाय नमः
ॐ त्रिलोचनाय नमः।
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये विस्तीर्णेन्द्रियात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः