विष्णु मंत्र
तद्विष्णोः परमं पदं सदा पश्यन्ति सूरयः। दिवीव चक्षुराततम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
ज्ञानी और देवगण भगवान विष्णु के उस परम पद के सदा दर्शन करते हैं, जो आकाश में फैले हुए नेत्र के समान सर्वव्यापी है।
इस मंत्र से क्या होगा?
सर्वोच्च आध्यात्मिक सत्य की प्राप्ति और ब्रह्मांडीय चेतना का ज्ञान
विस्तृत लाभ
सर्वोच्च आध्यात्मिक सत्य की प्राप्ति और ब्रह्मांडीय चेतना का ज्ञान।
जप काल
वैदिक देव-पूजन, यज्ञ या देव-प्रतिष्ठा के समय 4।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ यशोदावत्सलाय नमः
ॐ कलिकल्मषनाशिन्यै नमः
ॐ आरम्यायै नमः
ॐ श्रीं ह्रीं ब्राह्म्यै स्वाहेति दन्तपङ्क्तीः सदाऽवतु। (स्वरूप: ब्राह्मी | लाभ: दाँतों और स्पष्ट वाचन-स्थान की रक्षा | अर्थ: ब्राह्मी देवी मेरी दंत-पंक्तियों की सदा रक्षा करें) 8
नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शङ्कराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।
गोपनीयमिदं देवि ममात्मासि मणिर्यथा। धन्यं यशस्यमायुष्यं श्रीकरं पुष्टिवर्धनम्॥