शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हयग्रीव गायत्री मंत्र
ॐ वागीश्वराय विद्महे हयग्रीवाय धीमहि तन्नो हयग्रीवः प्रचोदयात्।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपविद्या-स्वरूप हयग्रीव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हम विद्या के स्वामी अश्वमुख भगवान हयग्रीव का ध्यान करते हैं; वे हमें ज्ञान से प्रकाशित करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
स्मरण शक्ति (Memory), एकाग्रता और समस्त विद्याओं की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
स्मरण शक्ति (Memory), एकाग्रता और समस्त विद्याओं की प्राप्ति 66।
जप काल
विद्यार्थियों द्वारा अध्ययन से पूर्व।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ब्रह्मक्षत्राय विद्महे क्षत्रियान्ताय धीमहि तन्नो रामः प्रचोदयात्
मुनीन्द्रवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणि प्रसन्नवक्त्रपङ्कजे निकुञ्जभूविलासिनि। व्रजेन्द्रभानुनन्दिनि व्रजेन्द्रसूनुसङ्गते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥ मुनीन्द्र-वन्दिते (ऋषियों द्वारा वंदित)
ॐ गणस्वामिने नमः
ॐ स्वाहायै नमः
ॐ योगिनीपतये नमः।
ॐ कलमञ्जीरचरणायै नमः