हंसकल्प सूर्य नमस्कार विधिरुद्रयामल तंत्रहिन्दी
हंसकल्प सूर्य नमस्कार २४ मंत्र विधि -रुद्रयामल तंत्र
श्रीदेवता✦ श्री सवितृ सूर्यनारायण
नवग्रह साधनासूर्य साधनासूर्य नमस्कार मंत्रहंसकल्प नमस्काररुद्रयामल तंत्र
तंत्र संदर्भ
स्रोत में सूर्योपासना के सर्व रोग निवारक तूचाकल्प और हंसकल्प नमस्कार प्रयोगों के अंतर्गत '(घ) हंसकल्प नमस्कारः' शीर्षक से श्रीसवितृसूर्यनारायणदेवता प्रीत्यर्थं संकल्प, ध्यान और १ से २५ तक हंसकल्प नमस्कार मन्त्र दिए गए हैं।
मूल मंत्र
(घ) हंसकल्प नमस्कारः आचम्य प्राणानायम्य । तिथिविष्णुस्तथा वारो नक्षत्रं विष्णुरेव च । योगश्च करणं विष्णुः सर्वं विष्णुमयं जगत् ॥१॥ अथ पूर्वोच्चारितं गुणविशेषेण विशिष्टायां शुभपुण्यतिथौ ममात्मनः श्रुतिस्मृतिपुराणोक्तफलप्राप्त्यर्थं श्रीसवितृसूर्यनारायणदेवता प्रीत्यर्थं च श्रीहंसकल्पनोक्तविधिना यथाशक्ति नमस्काराख्यं कर्म करिष्ये । अथ ध्यानम्--ध्येयः सदा सवितृमण्डलमध्यवर्ती० (इत्यादि पूर्ववत्) १. ॐ हां हंसः शुचिषत् ॐ हां मित्राय नमः । २. ॐ हीं वसुरंतरिक्षसत् ॐ हीं रवये नमः । ३. ॐ हूं होता वेदिषत् ॐ हूं सूर्याय नमः । ४. ॐ हैं अतिथिदुरोणसत् ॐ हैं भानवे नमः । ५. ॐ हों नृषत् ॐ हों खगाय नमः । ६. ॐ हः वरसत् ॐ हः पूष्णे नमः । ७. ॐ हां ऋतसत् ॐ हां हिरण्यगर्भाय नमः । ८. ॐ हीं व्योमसत् ॐ हीं मरीचये नमः । ९. ॐ हूं अब्जा गोजाः ॐ हूं आदित्याय नमः । १०. ॐ हैं ऋतजाऽअद्रिजा ॐ हैं सवित्रे नमः । ११. ॐ हों ऋतम् ॐ हों अर्काय नमः । १२. ॐ हः बृहत् ॐ हः भास्कराय नमः । १३. ॐ हां हीं हंसः शुचिसद्वसुरन्तरिक्षसत् ॐ हां हीं मित्ररविभ्यां नमः । १४. ॐ हूं हैं होता वेदिषदतिथिदुरोणसत् ॐ हूं हैं सूर्यभानुभ्यां नमः । १५. ॐ हों हः नृषद्वरसत् ॐ हों हः खगपूषभ्यां नमः । १६. ॐ हां हीं ऋतसद्व्योमसत् ॐ हां हीं हिरण्यगर्भमरीचिभ्यां नमः । १७. ॐ हूं हैं अब्जा गोजाऽऋतजाऽअद्रिजाः ॐ हूं हैं आदित्यसवितृभ्यां नमः । १८. ॐ हों हः ऋतं बृहत् ॐ हों हः अर्कभास्कराभ्यां नमः । १९. ॐ हां हीं हूं हैं हंसः शुचिषद्वसुरन्तरिक्षसद्धोता वेदिषदतिथिदुरोणसत् ॐ हां हीं हूं हैं मित्ररविसूर्यभानुभ्यो नमः । २०. ॐ हों हः हां हीं नृषद्वरसदृतसद् व्योमसत् ॐ हों हः हां हीं खगपूषहिरण्यगर्भमरीचिभ्यो नमः । २१. ॐ हूं हैं हों हः अब्जा गोजाऽऋतजाऽअद्रिजाऽऋतं बृहत् ॐ हूं हैं हों हः आदित्यसवितर्कभास्करेभ्यो नमः । २२-२४. ॐ हां हीं हूं हैं हों हः ॐ हां हीं हूं हैं हों हः हंसः शुचिषद्वसुरन्तरिक्षसद्धोता वेदिषदतिथिदुरोणसत् । नृषद्वरसदृतसद् व्योमसदब्जा गोजाऽऋतजाऽअद्रिजाऽऋतंबृहत् ॥१॥ ॐ हां हीं हूं हैं हों हः ॐ हां हीं हूं हैं हों हः मित्ररविसूर्यभानुखगपूष हिरण्यगर्भमरीच्यादित्यसवितर्कभास्करेभ्यो नमः । २५. ॐ श्रीसवित्रे सूर्यनारायणाय नमः । आदित्यस्य नमस्कारान् ० इत्यादि पूर्ववत् । (इति तीर्थं गृहीत्वाऽऽचमनं कुर्यात्)
बीज मंत्र
ॐहांहींहूंहैंहोंहः
साधना विधि
स्रोत के अनुसार आचमन और प्राणायाम के बाद तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण को विष्णुमय मानते हुए संकल्प किया जाता है। संकल्प में श्रुति-स्मृति-पुराणोक्त फलप्राप्ति और श्रीसवितृसूर्यनारायणदेवता की प्रीति के लिए श्रीहंसकल्पनोक्त विधि से यथाशक्ति नमस्काराख्य कर्म करने का विधान है। ध्यान 'ध्येयः सदा सवितृमण्डलमध्यवर्ती०' से पूर्ववत् बताया गया है। इसके बाद १ से २५ तक हंसकल्प नमस्कार मन्त्र दिए गए हैं और अंत में तीर्थ लेकर आचमन करने को कहा गया है।
प्रयोग — कब और कहाँ
- हंसकल्प नमस्कार
- सूर्य नमस्कार २४ विधि
- श्रीसवितृ सूर्यनारायण उपासना
- सूर्योपासना
- सर्व रोग निवारक प्रयोग
लाभ
- स्रोत के पूर्व परिचय में तूचाकल्प और हंसकल्प को सर्व रोग निवारक प्रयोग कहा गया है
- स्रोत में इन्हें अत्यन्त महत्त्वपूर्ण और लाभकारी बताया गया है
- श्रीसवितृ सूर्यनारायणदेवता की प्रीति के लिए संकल्पित नमस्कार कर्म बताया गया है
मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)
(घ) हंसकल्प नमस्कारः आचम्य प्राणानायम्य । तिथिविष्णुस्तथा वारो नक्षत्रं विष्णुरेव च । योगश्च करणं विष्णुः सर्वं विष्णुमयं जगत् ॥१॥ अथ पूर्वोच्चारितं गुणविशेषेण विशिष्टायां शुभपुण्यतिथौ ममात्मनः श्रुतिस्मृतिपुराणोक्तफलप्राप्त्यर्थं श्रीसवितृसूर्यनारायणदेवता प्रीत्यर्थं च श्रीहंसकल्पनोक्तविधिना यथाशक्ति नमस्काराख्यं कर्म करिष्ये । अथ ध्यानम्--ध्येयः सदा सवितृमण्डलमध्यवर्ती० (इत्यादि पूर्ववत्) १. ॐ हां हंसः शुचिषत् ॐ हां मित्राय नमः । २. ॐ हीं वसुरंतरिक्षसत् ॐ हीं रवये नमः । ३. ॐ हूं होता वेदिषत् ॐ हूं सूर्याय नमः । ४. ॐ हैं अतिथिदुरोणसत् ॐ हैं भानवे नमः । ५. ॐ हों नृषत् ॐ हों खगाय नमः । ६. ॐ हः वरसत् ॐ हः पूष्णे नमः । ७. ॐ हां ऋतसत् ॐ हां हिरण्यगर्भाय नमः । ८. ॐ हीं व्योमसत् ॐ हीं मरीचये नमः । ९. ॐ हूं अब्जा गोजाः ॐ हूं आदित्याय नमः । १०. ॐ हैं ऋतजाऽअद्रिजा ॐ हैं सवित्रे नमः । ११. ॐ हों ऋतम् ॐ हों अर्काय नमः । १२. ॐ हः बृहत् ॐ हः भास्कराय नमः । १३. ॐ हां हीं हंसः शुचिसद्वसुरन्तरिक्षसत् ॐ हां हीं मित्ररविभ्यां नमः । १४. ॐ हूं हैं होता वेदिषदतिथिदुरोणसत् ॐ हूं हैं सूर्यभानुभ्यां नमः । १५. ॐ हों हः नृषद्वरसत् ॐ हों हः खगपूषभ्यां नमः । १६. ॐ हां हीं ऋतसद्व्योमसत् ॐ हां हीं हिरण्यगर्भमरीचिभ्यां नमः । १७. ॐ हूं हैं अब्जा गोजाऽऋतजाऽअद्रिजाः ॐ हूं हैं आदित्यसवितृभ्यां नमः । १८. ॐ हों हः ऋतं बृहत् ॐ हों हः अर्कभास्कराभ्यां नमः । १९. ॐ हां हीं हूं हैं हंसः शुचिषद्वसुरन्तरिक्षसद्धोता वेदिषदतिथिदुरोणसत् ॐ हां हीं हूं हैं मित्ररविसूर्यभानुभ्यो नमः । २०. ॐ हों हः हां हीं नृषद्वरसदृतसद् व्योमसत् ॐ हों हः हां हीं खगपूषहिरण्यगर्भमरीचिभ्यो नमः । २१. ॐ हूं हैं हों हः अब्जा गोजाऽऋतजाऽअद्रिजाऽऋतं बृहत् ॐ हूं हैं हों हः आदित्यसवितर्कभास्करेभ्यो नमः । २२-२४. ॐ हां हीं हूं हैं हों हः ॐ हां हीं हूं हैं हों हः हंसः शुचिषद्वसुरन्तरिक्षसद्धोता वेदिषदतिथिदुरोणसत् । नृषद्वरसदृतसद् व्योमसदब्जा गोजाऽऋतजाऽअद्रिजाऽऋतंबृहत् ॥१॥ ॐ हां हीं हूं हैं हों हः ॐ हां हीं हूं हैं हों हः मित्ररविसूर्यभानुखगपूष हिरण्यगर्भमरीच्यादित्यसवितर्कभास्करेभ्यो नमः । २५. ॐ श्रीसवित्रे सूर्यनारायणाय नमः । आदित्यस्य नमस्कारान् ० इत्यादि पूर्ववत् । (इति तीर्थं गृहीत्वाऽऽचमनं कुर्यात्)
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