दिव्य मंत्र, स्तोत्र एवं साधना विधि
श्रीशिव-शक्ति परम्परा के दुर्लभ मंत्र, बीज-मंत्र, कवच एवं सम्पूर्ण साधना-विधियाँ — देवता, ऋषि, छन्द, प्रयोग एवं फल सहित।
प्रमुख देवता एवं उनके मंत्र
विशेष चयनित मंत्र
नवग्रह जपनीय मंत्र जप संख्या और समिधा -रुद्रयामल तंत्र
(ङ) अन्य ग्रहों के विविध उपाय सूर्य के अतिरिक्त चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु ग्रहों को प्रसन्नता और उनके द्वारा प्राप्त हो रही पीड़ाओं को नष्ट करने के लिए वैदिक मन्त्र और तान्त्रिक मन्त्रों का प्रयो
- ग्रहों की प्रसन्नता के लिए प्रयोग बताया गया
- ग्रहों से प्राप्त पीड़ाओं को नष्ट करने के लिए प्रयोग बताया गया
- अशुभ फल-दान काल में करने योग्य उपायों के ज्ञान के लिए तालिका दी गई
अच्युताय अनन्ताय गोविन्दाय रोग निवारण १८ अक्षर मंत्र -रुद्रयामल तंत्र
‘अच्युताय नमः अनन्ताय नमः गोविन्दाय नमः’ यह १८ अक्षर का मन्त्र सर्वविध रोगों की निवृत्ति के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। कोई भी दवा आदि लेने से पूर्व इस मन्त्र से उस दवा को अभिमन्त्रित कर लेना चाहिए। रुग्णावस्था में निरन
- सर्वविध रोगों की निवृत्ति के लिए महत्त्वपूर्ण बताया गया
- दवा को अभिमन्त्रित करने का विधान दिया गया
- रुग्णावस्था में निरन्तर स्मरण को पूर्ण लाभकारी बताया गया
नवग्रह कवच पाठ और ग्रह शांति विधि -रुद्रयामल तंत्र
सभी ग्रहों की प्रसन्नता एवं आत्मरक्षा के लिए निम्नलिखित कवच का पाठ अत्यन्त उपयोगी है। (च) नवग्रह कवच ॐ शिरो मे पातु मार्तण्डः कपालं रोहिणीपतिः। मुखमंगारकः पातु कण्ठं च शशिनन्दनः॥१॥ बुद्धिं जीवः सदा पातु हृदयं भृगुनन्दन
- सभी ग्रहों की प्रसन्नता के लिए उपयोगी बताया गया
- आत्मरक्षा के लिए उपयोगी बताया गया
- रोगी का स्पर्श करके पाठ करने से रोग शान्त होने का वर्णन
श्रीसुन्दरी / महात्रिपुर सुन्दरी
21 मंत्र / स्तोत्रमहात्रिपुर सुन्दरी अगस्त्योपासिता श्रीविद्या मंत्र -रुद्रयामल तंत्र
१९. कएईल हीं हसकहल हीं सहसकल हीं (अगस्त्यो- पासिता)
महात्रिपुर सुन्दरी ईशानोपासना श्रीविद्या मंत्र -रुद्रयामल तंत्र
११. कहल हौं हकल हललर हौं सकल हौं (ईशानोपासना)
महात्रिपुर सुन्दरी कुबेरोपासिता श्रीविद्या मंत्र -रुद्रयामल तंत्र
१८. हसकएईल हीं हसकहएईल हीं हरक एईल हीं (कुबेरोपासिता)
महामृत्युंजय भगवान् महादेव
6 मंत्र / स्तोत्रअमृतमृत्युंजय चतुरक्षरी मंत्र ॐ वं जूं सः -रुद्रयामल तंत्र
महामृत्युंजय के नाम से प्राप्त होने वाले विभिन्न मन्त्रों के स्वरूप ३. चतुरक्षरी अमृतमृत्युंजय मन्त्र इस मन्त्र में "ॐ वं जूं सः" ये चार अक्षर हैं। इसका जप करने से शरीर में बढ़े हुए ताप (गर्मी) की शीघ्र शान्ति होती है।
अमृतमृत्युंजय दशाक्षरी मंत्र ॐ जूं सः मां पालय पालय -रुद्रयामल तंत्र
महामृत्युंजय के नाम से प्राप्त होने वाले विभिन्न मन्त्रों के स्वरूप ५. दशाक्षरी—(अमृतमृत्युंजय विद्या) क्रमांक २ के मन्त्र में "मां पालय पालय" जोड़ने पर यह दस अक्षरों वाला मन्त्र बनता है। साथ ही यदि किसी अन्य रोगी की र
महामृत्युंजय एकाक्षरी मंत्र हौं -रुद्रयामल तंत्र
महामृत्युंजय के नाम से प्राप्त होने वाले विभिन्न मन्त्रों के स्वरूप १. एकाक्षरी मन्त्र—"हौं"
गुरु
4 मंत्र / स्तोत्रआज्ञाचक्र अजपा-जप निवेदन मन्त्र
आज्ञाचक्रे द्विदलपद्मे श्वेतवर्णे हं क्षं द्वयक्षरे लिंगयंत्रे नर- वाहने स्थिताय ज्ञानशक्तिसहिताय विद्युद्वर्णाय गुरवे सहस्रमेकमजपा- जपं निवेदयामि।
गुरु गायत्री
ॐ वेदादिगुरुदेवाय विद्महे, परमगुरवे धीमहि, तन्नो गुरुः प्रचोदयात्।
गुरु-कृपा प्राप्ति स्तोत्र
नमस्ते नाथ भगवन् ! शिवाय गुरुरूपिणे। विद्यावतारसंसिद्धये स्वीकृतानेक-विग्रह ॥१॥ नवाय नवरूपाय परमार्थैक रूपिणे। सर्वाज्ञान-तमोभेदभानवे चिद्धनाय ते ॥२॥ स्वतन्त्राय दयाक्लृप्त-विग्रहाय परात्मने। परतन्त्राय भक्तानां भव्या
इन्द्राक्षी
4 मंत्र / स्तोत्रमाँ इन्द्राक्षी पिंगलभैरवी त्रैलोक्यमोहिनी रक्षा मंत्र -रुद्रयामल तंत्र
॥ इन्द्राक्षी-मन्त्र २. ॐ नमो भगवति पिंगलभैरवी त्रैलोक्यलक्ष्मि त्रैलोक्यमोहिनीन्द्राक्षि मां रक्ष हूं फट् स्वाहा । ॐ नमो भगवति भद्रकालि महादेवि कृष्णवर्णे तुंगस्तनि शूलहस्ते कवाटवक्षः स्थले कपालधरे परशुधरे चापधरे विकृ
माँ इन्द्राक्षी शत्रु रोग ग्रन्थि नाशक रक्षा मंत्र -रुद्रयामल तंत्र
॥ इन्द्राक्षी-मन्त्र ५. ॐ एं श्रीं हुं दुं इन्द्राक्षि ! मां रक्ष रक्ष, मम शत्रून् नाशय नाशय, जलरोगान् शोषय शोषय, क्रूरानरीन् भंजय भंजय, दुःखव्याधीन् स्फोटय स्फोटय मनोग्रन्थिप्राणग्रन्थिशिरोग्रन्थोन् काटय काटय, इन्द्राक
माँ इन्द्राक्षी सर्व ज्वर नाशक महिषासुरमर्दिनी मंत्र -रुद्रयामल तंत्र
॥ इन्द्राक्षी-मन्त्र ३. ॐ नमो भगवति प्राणेश्वरि पद्मासने सिंहवाहने महिषासुरमर्दिन्युष्णज्वरपित्तज्वरवातज्वरश्लेष्मज्वरकफज्वरालापज्वरसंनिपातज्वरकृत्रिमज्वरकृत्यादिज्वरैकाहिकज्वरद्व्याहिकज्वरत्र्याहिकज्वरचतुराहिकज्वरपंचाह
श्रीहनुमान
3 मंत्र / स्तोत्रप्लीहा रोग नाशक हनुमान मंत्र और प्रयोग विधि -रुद्रयामल तंत्र
शाबर मन्त्रों के समान ही हनुमान जी के मन्त्र भी बहुत से प्राप्त होते हैं। उनमें से एक मन्त्र इस प्रकार है-- ६. ॐ यो यो हनूमन्त फलफलित धग्धगिति आयुरास परुडाह । यह २५ अक्षरों का मन्त्र प्लीहा रोग दूर करने में प्रयुक्त हो
ब्रह्मचर्य रक्षा और तत्त्व ज्ञान हनुमान मंत्र -रुद्रयामल तंत्र
ब्रह्मचर्य रक्षा एवं तत्त्व ज्ञान के लिए ८. ॐ नमो हनुमते मम मदनक्षोभं संहर संहर आत्मतत्त्वं प्रकाशय प्रकाशय हुं फट् स्वाहा।
भूत-प्रेत नाशक श्रीमहाञ्जनेय हनुमान मंत्र -रुद्रयामल तंत्र
भूत-प्रेत नाश के लिए ९. ॐ श्रीमहाञ्जनेयाय पवनपुत्रावेशयावेशय ॐ श्रीहनुमते फट् । इन मन्त्रों के विनियोग, न्यास, ध्यान, पीठ पूजा आदि भी विस्तार से प्राप्त होते हैं, उन्हें साधना के इच्छुक गुरु कृपा से प्राप्त करें।
महागणपति
3 मंत्र / स्तोत्रमहागणपति तर्पण मंत्र विधि और अन्य तर्पण प्रयोग रुद्रयामल तंत्र से
प्रणवं पूर्वमुच्चार्य ततो लक्ष्मीं समुच्चरेत्। ततो गणेशबीजञ्च सिद्ध्या च सहितं ततः ॥ इत्यादि। १. सामान्य क्रम मूलमन्त्र ४, महागणपति तर्पयामि स्वाहा ४, पुष्टि ४, मू० ४, श्रीं लक्ष्मीनारायणौ त० ४, हीं गौरीहरौ त० ४, मू० ४,
महागणपति पंचबालक षट्कुमार सप्तबालक उपासना पद्य
पञ्चबालक—हैरम्ब-शरजन्मानौ कार्तवीर्यार्जुनस्तथा । हनुमद्-भैरवावेतौ भाषिताः पञ्चबालकाः ॥ षट्कुमार—हैरम्ब-शरजन्मानौ महामृत्युञ्जयस्तथा । कार्तवीर्यार्जुनश्चैव हनुमद्-भैरवौ तथा ॥ इमे स्वयम्भयाश्च तन्त्रोक्ताः षट्कुमारकाः ।
महागणपति महामंत्र जप विधि विनियोग न्यास ध्यान
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।
इन्द्राक्षी दुर्गा
3 मंत्र / स्तोत्रमाँ इन्द्राक्षी कवच स्तोत्र विनियोग न्यास ध्यान और पाठ -रुद्रयामल तंत्र
इन्द्राक्षी कवच स्तोत्रम् विनियोग ॐ अस्य श्रीइन्द्राक्षीकवचस्तोत्रमहामन्त्रस्य शचीपुरन्दर ऋषिः अनुष्टुप् छन्दः । इन्द्राक्षी दुर्गा देवता । लक्ष्मीर्बीजम् । भुवनेश्वरी शक्तिः, भवानीति कीलकम्, मम इन्द्राक्षीप्रसादसिद्ध्
माँ इन्द्राक्षी महाचिन्तामणि दुर्गा ग्रह रोग नाशक मंत्र -रुद्रयामल तंत्र
॥ इन्द्राक्षी-मन्त्र ६. ॐ नमो भगवति माहेश्वरि महाचिन्तामणि दुर्गे सकलसिद्धेश्वरि सकलजनमनोहारिणि कालकालरात्र्यनलेऽजितेऽभये महाघोररूपे विश्वरूपिणि मधुसूदनि महाविष्णुस्वरूपिणि नेत्रशूलकर्णशूलकटिशूलपक्षशूलपाण्डुरोगकमलादीन्
माँ इन्द्राक्षी स्तोत्र रोग ज्वर अपमृत्यु निवारण पाठ -रुद्रयामल तंत्र
इन्द्राक्षी-स्तोत्रम इन्द्राक्षी नाम सा देवी देवतैः समुदाहृता। गौरी शाकम्भरी देवी दुर्गानाम्नीति विश्रुता॥१॥ कात्यायनी महादेवी चन्द्रघण्टा महातपाः। सावित्री सा च गायत्री ब्राह्मणी ब्रह्मवादिनी॥२॥ नारायणी भद्रकाली रुद्
कुण्डलिनी
2 मंत्र / स्तोत्रनवग्रह
2 मंत्र / स्तोत्रनवग्रह कवच पाठ और ग्रह शांति विधि -रुद्रयामल तंत्र
सभी ग्रहों की प्रसन्नता एवं आत्मरक्षा के लिए निम्नलिखित कवच का पाठ अत्यन्त उपयोगी है। (च) नवग्रह कवच ॐ शिरो मे पातु मार्तण्डः कपालं रोहिणीपतिः। मुखमंगारकः पातु कण्ठं च शशिनन्दनः॥१॥ बुद्धिं जीवः सदा पातु हृदयं भृगुनन्दन
नवग्रह जपनीय मंत्र जप संख्या और समिधा -रुद्रयामल तंत्र
(ङ) अन्य ग्रहों के विविध उपाय सूर्य के अतिरिक्त चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु ग्रहों को प्रसन्नता और उनके द्वारा प्राप्त हो रही पीड़ाओं को नष्ट करने के लिए वैदिक मन्त्र और तान्त्रिक मन्त्रों का प्रयो
आसुरी दुर्गा
2 मंत्र / स्तोत्रमाँ आसुरी गायत्री मंत्र जप विधि -रुद्रयामल तंत्र
३. अन्य प्रयोग--(१) लाल कम्बल का आसन बिछाकर उस पर आसुरी गायत्री का जप करे। गायत्री मन्त्र--ॐ ह्रीं आसुरि-दिव्यायै विद्महे, ॐ ऐं अथर्ववेदाय धीमहि ॐ ह्लौं हुं फट् प्रचोदयात्।
माँ आसुरी दुर्गा मूल मंत्र विनियोग न्यास ध्यान और प्रयोग विधि -रुद्रयामल तंत्र
(घ) आसुरी-दुर्गा मन्त्र-प्रयोग आसुरीदुर्गामन्त्र-विधान : विनियोग--अस्य श्री आसुरीदुर्गामन्त्रस्याङ्गिरसऋषिः विराट्छन्दः आसुरी दुर्गा देवता ॐ बीजं स्वाहा शक्तिः मम श्रीआसुरीदुर्गाप्रसादपूर्वकमभीष्टकर्मसिद्ध्यर्थं जपे विन
श्री
2 मंत्र / स्तोत्रमाँ कमला महालक्ष्मी ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं चतुर्बीज मंत्र और ध्यान -रुद्रयामल तंत्र
२. चतुर्बीजात्मक मन्त्र ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं न्यास उपर्युक्त ही हैं । ध्यान माणिक्यप्रतिमप्रभां हिमनिभैस्तुङ्गैश्चतुर्भिर्गजै- र्हस्ताग्राहितरत्नकुम्भसलिलैरासिच्यमानां सदा । हस्ताब्जैर्वरदानमञ्जुयुगलाभीतोर्दधानां हरे
माँ कमला महालक्ष्मी श्रीं एकाक्षर चिन्तामणि मंत्र और ध्यान -रुद्रयामल तंत्र
१. एकाक्षर मन्त्र श्रीं इसी को चिन्तामणि-मन्त्र भी कहा है। इसके ऋषि भृगु, निचृत् छन्द और श्री देवता हैं। 'श्रां, श्रीं, श्रूं, श्रैं, श्रौं, श्रः' इनसे कर-हृदयादिन्यास करने चाहिए। ध्यान कान्त्या कांचनसन्निभां हिमगिरि
अन्य दुर्लभ मंत्र
48 मंत्र- 64 भैरव चतुःषष्टि नामावली मंत्र -रुद्रयामल तंत्रचतुःषष्टि भैरवनामावली-पाठ
- अच्युताय अनन्ताय गोविन्दाय रोग निवारण १८ अक्षर मंत्र -रुद्रयामल तंत्रअच्युत, अनन्त, गोविन्द१८ अक्षर का मन्त्र
- अनाहतचक्र अजपा-जप निवेदन मन्त्रपरमशिवअजपा-जप निवेदन मन्त्र
- आद्याकाली मंत्र और जप विधि -रुद्रयामल तंत्रश्री आद्याकालीआद्याकाली मंत्र-जप-विधि
- आपदुद्धारक भैरव 108 नामावली मंत्र -रुद्रयामल तंत्रआपदुद्धारक श्री भैरवअष्टोत्तरशत नामावली स्तोत्र
- आयुष्कर अनुष्टुप्त्रय मृत्युंजय मंत्र ब्रह्मा नृसिंह त्र्यम्बक -रुद्रयामल तंत्रब्रह्मा, नृसिंहविष्णु और त्र्यम्बकरुद्रआयुष्कर मृत्युंजय मन्त्र
- उच्छिष्ट महागणपति प्रयोग मंत्र -रुद्रयामल तंत्रउच्छिष्ट महागणपतिउच्छिष्ट महागणपति प्रयोग / तांत्रिक मंत्र
- उपक्रम सीतापति राम मंत्र हन हन हुं फट् -रुद्रयामल तंत्रसीतापति रामउपक्रम मन्त्र
- कुण्डलिनी-स्तोत्राष्टकम्भगवती कुण्डलिनीस्तोत्राष्टकम्
- कुमारी पूजन आवाहन मंत्र और निमंत्रण विधि -रुद्रयामल तंत्रभगवती कुमारिकाकुमारी आवाहन मन्त्र
- कुमारी पूजन पूजा मंत्र और नवदुर्गा पूजन विधि -रुद्रयामल तंत्रकुमारिका / नवदुर्गाकुमारी पूजा-मन्त्र
- गणपति के 12 नाम मंत्र और 16 नाम स्मरण रुद्रयामल तंत्र सेगणपतिनामोपासना / नाम-स्मरण
- गणेश स्तवराज गणेशाष्टक पाठ विधि फल और सात मुद्राएंश्रीमहागणपतिस्तोत्र / गणेशाष्टक
- गायत्री पटल दस प्रयोग और सर्वार्थ साधनकर गायत्री यन्त्र विधि -रुद्रयामल तंत्रगायत्री मातागायत्री यन्त्र विधान
- गायत्री पटल मूल मंत्रोद्धार ध्यान और गायत्री देवी गायत्री मंत्र -रुद्रयामल तंत्रगायत्रीगायत्री पटल मन्त्रोद्धार और ध्यान
- गुरु-पादुका ध्यानश्रीविद्यागुरुपादुकाध्यान
- गुरु-यन्त्र स्वरूप श्लोकश्रीगुरुयन्त्र-वर्णन श्लोक
- गुरुपादुका मन्त्रगुरुपादुकागुरु-पादुका मन्त्र
- तान्त्रिक शिव संजीवनी प्रयोग महामृत्युंजय मंत्र सम्पुट -रुद्रयामल तंत्रमहामृत्युंजय शिवमहामृत्युंजय मन्त्र सम्पुट
- तेईस अक्षरी श्रीराम मंत्र दाशरथाय सीतावल्लभाय जप विधि -रुद्रयामल तंत्रश्रीराम२३ अक्षरी श्रीराम मन्त्र
- त्रिपदा गायत्री स्तवराज मंत्र जप विधि और फल -रुद्रयामल तंत्रत्रिपदा गायत्रीगायत्री स्तवराज
- दशाक्षरी श्रीराम मंत्र जानकीवल्लभ जप विधि -रुद्रयामल तंत्रश्रीजानकीवल्लभदशाक्षरी श्रीराम मन्त्र
- द्वादशाक्षरी विष्णु मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय -रुद्रयामल तंत्रभगवान् वासुदेवद्वादशाक्षरी मन्त्र
- नृसिंह बीज मंत्र क्षौं भय और दुःस्वप्न नाश -रुद्रयामल तंत्रभगवान् नृसिंहबीजमन्त्र
- पार्थिव शिवलिंग पूजा विधान और मंत्र -रुद्रयामल तंत्रश्रीसाम्बसदाशिवपार्थिव शिवलिंग पूजा विधान
- पौराणिक मृत्युंजय महारुद्र मंत्र -रुद्रयामल तंत्रमृत्युंजय महारुद्रपौराणिक मृत्युंजय मंत्र
- बटुक भैरव मंत्र और जप विधान -रुद्रयामल तंत्रश्रीबटुकभैरवआपदुद्धारण-बटुकभैरव-मन्त्र
- बाल भैरव पूजा मंत्र और वटुक भैरव आपदुद्धारण मंत्र -रुद्रयामल तंत्रबाल भैरव / वटुक भैरवबाल भैरव पूजा मन्त्र
- बृहद् महामृत्युंजय माला मंत्र बीज मंत्र सहित -रुद्रयामल तंत्रमहामृत्युंजयबृहद् महामृत्युंजय माला मन्त्र
- ब्रह्मरन्ध्र अजपा-जप निवेदन मन्त्रपरमात्माअजपा-जप निवेदन मन्त्र
- भगवान परशुराम गायत्री मंत्र और सात्त्विक ध्यान -रुद्रयामल तंत्रश्री परशुरामपरशुराम गायत्री मंत्र और सात्त्विक ध्यान
- भगवान शिव तांत्रिक उपासना ध्यान मंत्र -रुद्रयामल तंत्रभगवान शिवशिव ध्यान मंत्र
- भैरव 108 नाम हिन्दी नामावली पाठ -रुद्रयामल तंत्रबटुक भैरवहिन्दी नामावली पाठ / चौपाई स्तोत्र
- भैरवनाथ अनुज्ञा प्रार्थना मंत्र -रुद्रयामल तंत्रभगवान् भैरवनाथप्रार्थना मंत्र / अनुज्ञा मंत्र
- मणिपूरचक्र अजपा-जप निवेदन मन्त्रविष्णुअजपा-जप निवेदन मन्त्र
- महामृत्युंजय साधना मुख्य संकेत और रुद्राणी रुद्र ध्यान -रुद्रयामल तंत्रमहामृत्युंजय भगवान् महादेव / रुद्र-रुद्राणीमहामृत्युंजय साधना संकेत
- माँ अग्निदुर्गा मंत्र विनियोग न्यास ध्यान और जप विधि -रुद्रयामल तंत्रअग्निदुर्गाअग्निदुर्गा मंत्र
- माँ अम्बिका दुर्गा मंत्र विनियोग न्यास ध्यान और जप विधि -रुद्रयामल तंत्रअम्बिकादुर्गाअम्बिका दुर्गा मंत्र
- माँ इन्द्राक्षी दुर्गा यन्त्र पूजा और मंत्र जप विधि -रुद्रयामल तंत्रइन्द्राक्षी-दुर्गाइन्द्राक्षी दुर्गा मंत्र
- माँ इन्द्राक्षी महालक्ष्मी सर्वजन वशंकर्यै मंत्र -रुद्रयामल तंत्रइन्द्राक्षी महालक्ष्मीइन्द्राक्षी मंत्र
- माँ कमला महालक्ष्मी त्रयोदशाक्षरी सौभाग्य सम्पत्ति प्राप्ति मंत्र -रुद्रयामल तंत्रश्रीकमलात्मिकाकमला त्रयोदशाक्षरी मंत्र
- माँ काली कवच पाठ आत्मरक्षा और शत्रु नाश -रुद्रयामल तंत्रश्री कालिकाकाली कवच-पाठ
- माँ गिरिदुर्गा मंत्र विनियोग न्यास ध्यान और जप विधि -रुद्रयामल तंत्रगिरिदुर्गागिरिदुर्गा मंत्र
- माँ चण्डिका दुर्गा मंत्र विनियोग न्यास ध्यान और जप विधि -रुद्रयामल तंत्रचण्डिकादुर्गाचण्डिका दुर्गा मंत्र
- माँ छिन्नमस्ता प्रणति पद्य स्तुति -रुद्रयामल तंत्रछिन्नमस्ता-भगवतीप्रणति पद्य स्तुति
- ज्ञानमार्गोक्त पंचमकार स्तोत्रम्स्तोत्र
- पञ्चबालक पद्यपद्य
- पृथिव्यात्मक गन्ध समर्पण मन्त्रमानसोपचार-पूजा मन्त्र