दिव्य मंत्र, स्तोत्र एवं साधना विधि
श्रीशिव-शक्ति परम्परा के दुर्लभ मंत्र, बीज-मंत्र, कवच एवं सम्पूर्ण साधना-विधियाँ — देवता, ऋषि, छन्द, प्रयोग एवं फल सहित।
प्रमुख देवता एवं उनके मंत्र
विशेष चयनित मंत्र
गणपति के 12 नाम मंत्र और 16 नाम स्मरण रुद्रयामल तंत्र से
(क) विघ्न-विनायक के १६ नामों का स्मरण इस प्रकार है-- १. बालविघ्नेशाय नमः; २. तरुणाय नमः; ३. भक्तविघ्नेशाय नमः; ४. वीरविघ्नकाय नमः; ५. शक्तिविघ्नेशाय नमः; ६. द्विजगणाधिपाय नमः; ७. सिद्धिऋद्धीशाय नमः; ८. उच्छिष्टाय नमः; ९.
- विघ्नों का निवारण होता है
- मांगलिक कार्यों के आरम्भ में स्मरण योग्य
- यात्रा में आने-जाने के समय स्मरण योग्य
पार्थिव शिवलिंग पूजा विधान और मंत्र -रुद्रयामल तंत्र
इसके अनुसार शिव समस्त विद्याओं के अधिपति हैं और सब के गुरु हैं। आगमों की सृष्टि ही शिव और पार्वती के संवाद के रूप में हुई है। रुद्रयामल में 'पार्थिव-पूजा' को सभी विद्याओं की साधना का अधिकार-प्राप्त करने का आधार माना है।
- सभी विद्याओं की साधना का अधिकार-प्राप्त करने का आधार
- देवता पूजनाधिकार सिद्धि
- श्रीसाम्बसदाशिव प्रीति
आपदुद्धारक भैरव 108 नामावली मंत्र -रुद्रयामल तंत्र
ॐ ह्रीं भैरवो भूतनाथश्च भूतात्मा भूतभावनः। क्षेत्रज्ञः क्षेत्रपालश्च क्षेत्रदः क्षत्रियो विराट् ॥१॥ श्मशानवासी मांसाशी खर्पराशी स्मरान्तकः। रक्तपः पानपः सिद्धः सिद्धिदः सिद्धसेवितः ॥२॥ कङ्कालः कालशमनः कलाकाष्ठातनुः कवि
- स्मरणमात्र से सर्वकामनाओं की पूर्णता
- अत्यन्त प्रभावशाली एवं सद्यः फलदायी
- पाठ तथा पूजन में प्रयोग
श्रीसुन्दरी / महात्रिपुर सुन्दरी
20 मंत्र / स्तोत्रमहात्रिपुर सुन्दरी अगस्त्योपासिता श्रीविद्या मंत्र -रुद्रयामल तंत्र
१९. कएईल हीं हसकहल हीं सहसकल हीं (अगस्त्यो- पासिता)
महात्रिपुर सुन्दरी ईशानोपासना श्रीविद्या मंत्र -रुद्रयामल तंत्र
११. कहल हौं हकल हललर हौं सकल हौं (ईशानोपासना)
महात्रिपुर सुन्दरी कुबेरोपासिता श्रीविद्या मंत्र -रुद्रयामल तंत्र
१८. हसकएईल हीं हसकहएईल हीं हरक एईल हीं (कुबेरोपासिता)
महामृत्युंजय भगवान् महादेव
7 मंत्र / स्तोत्रअमृतमृत्युंजय चतुरक्षरी मंत्र ॐ वं जूं सः -रुद्रयामल तंत्र
महामृत्युंजय के नाम से प्राप्त होने वाले विभिन्न मन्त्रों के स्वरूप ३. चतुरक्षरी अमृतमृत्युंजय मन्त्र इस मन्त्र में "ॐ वं जूं सः" ये चार अक्षर हैं। इसका जप करने से शरीर में बढ़े हुए ताप (गर्मी) की शीघ्र शान्ति होती है।
अमृतमृत्युंजय दशाक्षरी मंत्र ॐ जूं सः मां पालय पालय -रुद्रयामल तंत्र
महामृत्युंजय के नाम से प्राप्त होने वाले विभिन्न मन्त्रों के स्वरूप ५. दशाक्षरी—(अमृतमृत्युंजय विद्या) क्रमांक २ के मन्त्र में "मां पालय पालय" जोड़ने पर यह दस अक्षरों वाला मन्त्र बनता है। साथ ही यदि किसी अन्य रोगी की र
महामृत्युंजय एकाक्षरी मंत्र हौं -रुद्रयामल तंत्र
महामृत्युंजय के नाम से प्राप्त होने वाले विभिन्न मन्त्रों के स्वरूप १. एकाक्षरी मन्त्र—"हौं"
गुरु
4 मंत्र / स्तोत्रआज्ञाचक्र अजपा-जप निवेदन मन्त्र
आज्ञाचक्रे द्विदलपद्मे श्वेतवर्णे हं क्षं द्वयक्षरे लिंगयंत्रे नर- वाहने स्थिताय ज्ञानशक्तिसहिताय विद्युद्वर्णाय गुरवे सहस्रमेकमजपा- जपं निवेदयामि।
गुरु गायत्री
ॐ वेदादिगुरुदेवाय विद्महे, परमगुरवे धीमहि, तन्नो गुरुः प्रचोदयात्।
गुरु-कृपा प्राप्ति स्तोत्र
नमस्ते नाथ भगवन् ! शिवाय गुरुरूपिणे। विद्यावतारसंसिद्धये स्वीकृतानेक-विग्रह ॥१॥ नवाय नवरूपाय परमार्थैक रूपिणे। सर्वाज्ञान-तमोभेदभानवे चिद्धनाय ते ॥२॥ स्वतन्त्राय दयाक्लृप्त-विग्रहाय परात्मने। परतन्त्राय भक्तानां भव्या
महागणपति
4 मंत्र / स्तोत्रमहागणपति तर्पण मंत्र विधि और अन्य तर्पण प्रयोग रुद्रयामल तंत्र से
प्रणवं पूर्वमुच्चार्य ततो लक्ष्मीं समुच्चरेत्। ततो गणेशबीजञ्च सिद्ध्या च सहितं ततः ॥ इत्यादि। १. सामान्य क्रम मूलमन्त्र ४, महागणपति तर्पयामि स्वाहा ४, पुष्टि ४, मू० ४, श्रीं लक्ष्मीनारायणौ त० ४, हीं गौरीहरौ त० ४, मू० ४,
महागणपति पंचबालक षट्कुमार सप्तबालक उपासना पद्य
पञ्चबालक—हैरम्ब-शरजन्मानौ कार्तवीर्यार्जुनस्तथा । हनुमद्-भैरवावेतौ भाषिताः पञ्चबालकाः ॥ षट्कुमार—हैरम्ब-शरजन्मानौ महामृत्युञ्जयस्तथा । कार्तवीर्यार्जुनश्चैव हनुमद्-भैरवौ तथा ॥ इमे स्वयम्भयाश्च तन्त्रोक्ताः षट्कुमारकाः ।
महागणपति महामंत्र जप विधि विनियोग न्यास ध्यान
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।
श्री धूमावती
3 मंत्र / स्तोत्रमाँ धूमावती प्रणाम पद्य स्तोत्र -रुद्रयामल तंत्र
प्रणाम करने का पद्य वन्दे कालाभ्रनीलां विकलितवदनां काकनासां विकर्णां सम्मार्जिन्युल्कशूर्पयुत-मुसलकरां वक्रदन्तां विशुष्कास्याम् । ज्येष्ठां निर्वर्णवेषां भ्रुकुटितनयनां मुक्तकेशामुदारां, पीनोत्तुङ्गाद्रितुङ्गस्तनभरनमित
माँ धूमावती माला मंत्र जप और प्रयोग विधि -रुद्रयामल तंत्र
ॐ, धूं धूमावति चतुर्दशभुवननिवासिनि सकलग्रहोच्चाटनि सकलशत्रुरक्तमांसभक्षिणि, मम शरीररक्षिणि भूतप्रेत-पिशाचब्रह्मराक्षसादि सकलग्रहसंहारिणि मम शरीर परमन्त्र-परयन्त्र-परतन्त्रनिवारिणि आत्ममन्त्रयन्त्रतन्त्र प्रकाशिनि मम शरीर
माँ धूमावती मूल मंत्र विनियोग न्यास और ध्यान -रुद्रयामल तंत्र
ॐ धूं धूं धूं धूमावति स्वाहा विनियोग अस्य श्रीधूमावती मन्त्रस्य स्कन्दऋषिः पङ्क्तिश्छन्दः श्रीधूमावतीदेवता धूं बीजं स्वाहा शक्तिः प्रणवः कीलकं मम शत्रुक्षयार्थ विनियोगः । ऋष्यादिन्यास स्कन्दऋषये नमः (शिरसि) । पङ्क्ति
श्री बगलामुखी
3 मंत्र / स्तोत्रमाँ बगलामुखी ऐश्वर्य प्राप्ति और कार्य सिद्धि ब्रह्मास्त्र मंत्र विधि -रुद्रयामल तंत्र
एक अन्य मन्त्र ॐ ह्लीं ऐं श्रीं क्लीं श्रीबगलानने मम रिपून् नाशय नाशय ऐश्वर्याणि देहि देहि शीघ्रं मनोवांछितं कार्य साधय साधय ह्लीं स्वाहा । विनियोग ॐ अस्य श्रीबगलामुखी ब्रह्मास्त्रस्वरूपिणी मन्त्रस्य भैरवऋषिः विराट् छ
माँ बगलामुखी शत्रु स्तम्भन सिद्ध स्तोत्र और पाठ विधि -रुद्रयामल तंत्र
(ग) श्रीबगलामुखीस्तोत्रम् विनियोग अस्य श्रीबगलामुखीस्तोत्रस्य नारदऋषिः श्रीबगलामुखीदेवता मम सन्निहितानां विरोधिनां वाङ्मुखपदबुद्धीनां स्तम्भनार्थं विनियोगः । मध्ये सुधाब्धिमणिमण्डपरत्नवेद्यां, सिंहासनोपरिगतां परिपीतवर
माँ बगलामुखी सर्वदुष्ट स्तम्भन मूल मंत्र विनियोग न्यास और जप विधि -रुद्रयामल तंत्र
दक्षिणाम्नाय मन्त्र ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा । ऊर्ध्वाम्नाय ब्रह्मास्त्रस्वरूपिणी बगला मन्त्र ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं स्तम्भय, जिह्वा
कुण्डलिनी
2 मंत्र / स्तोत्रछिन्नमस्ता-भगवती
2 मंत्र / स्तोत्रमाँ छिन्नमस्ता प्रणति पद्य स्तुति -रुद्रयामल तंत्र
व्याघ्राजिनरञ्जितस्वजघनेऽरण्ये प्रलम्बोदये, खर्वेऽनिर्वचनीयपर्वसुभगे मुण्डावलीमण्डिते । कर्त्रीं कुन्दरुचिं विचित्रवनितां ज्ञाने दधाने पदे, मातर्भक्तजनानुकम्पिनि महामायेऽस्तु तुभ्यं नमः॥
माँ छिन्नमस्ता स्तवराज स्तोत्र पाठ -रुद्रयामल तंत्र
नाभो शुद्धारविन्दं तदुपरि विलसन्मण्डलं चण्डरश्मेः, संसारस्यैकसारां विभुवनजननीं धर्मकामार्थदात्रीम् । तस्मिन् मध्ये विभागे त्रितयतनुधरां छिन्नमस्तां प्रशस्तां, तां वन्दे छिन्नमस्तां शमनभयहरां योगिनां योगमुद्राम् ॥१॥ नाभो
श्रीभुवनेश्वरी
2 मंत्र / स्तोत्रमाँ भुवनेश्वरी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र पाठ -रुद्रयामल तंत्र
विनियोग--अस्य श्रीभुवनेश्वर्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रस्य शक्ति- ऋषिः गायत्रीच्छन्दः । श्रीभुवनेश्वरीदेवता मम चतुर्वर्गसाधनार्थं पाठे । पूजने विनियोगः । --इसके न्यास, ध्यानादि एकाक्षरी मन्त्र के समान करें। महामाया महाविद्या
माँ भुवनेश्वरी एकाक्षरी द्व्यक्षरी और पंचाक्षरी मंत्र विधान -रुद्रयामल तंत्र
विनियोग--अस्य श्री भुवनेश्वरीमन्त्रस्य शक्तिर्ऋषिर्गायत्री- च्छन्दो भुवनेश्वरी देवता हकारो बीजम्, ईकारः शक्तिः, रेफः कीलकं चतुर्वर्गसिद्ध्यर्थं जपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यास--ऋषये नमः (शिरसि) । गायत्रीच्छन्दसे नमः (मुखे)
श्रीमातंगी
2 मंत्र / स्तोत्रमाँ मातंगी मूल मंत्र विनियोग ध्यान और जप विधि -रुद्रयामल तंत्र
(ख) मन्त्र-विधान विनियोग अस्य श्रीमातंगीमन्त्रस्य दक्षिणामूर्तिरृषिः विराट् छन्दः श्रीमातंगीदेवता ह्रीं बीजं हूं शक्तिः क्लीं कीलकं मम सर्ववांछितार्थसिद्धये जपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यास दक्षिणामूर्तिऋषये नमः (शिरसि),
माँ मातंगी वाग्देवता स्तोत्र पाठ -रुद्रयामल तंत्र
(ग) श्रीमातङ्गी स्तोत्रम् आराध्य मातश्चरणाम्बुजे ते, ब्रह्मादयो विस्तृत कीर्तिमापुः । अन्ये परं वा विभवं मुनीन्द्राः, परां धियं भक्तिपरेण चान्ये ॥१॥ नमामि देवीं नवचन्द्रमौलेर्मतङ्गिनीं चन्द्रकलावतंसाम् । आम्नायप्राप्ति
अन्य दुर्लभ मंत्र
50 मंत्र- 64 भैरव चतुःषष्टि नामावली मंत्र -रुद्रयामल तंत्रचतुःषष्टि भैरवनामावली-पाठ
- अनाहतचक्र अजपा-जप निवेदन मन्त्रपरमशिवअजपा-जप निवेदन मन्त्र
- आद्याकाली मंत्र और जप विधि -रुद्रयामल तंत्रश्री आद्याकालीआद्याकाली मंत्र-जप-विधि
- आपदुद्धारक भैरव 108 नामावली मंत्र -रुद्रयामल तंत्रआपदुद्धारक श्री भैरवअष्टोत्तरशत नामावली स्तोत्र
- आयुष्कर अनुष्टुप्त्रय मृत्युंजय मंत्र ब्रह्मा नृसिंह त्र्यम्बक -रुद्रयामल तंत्रब्रह्मा, नृसिंहविष्णु और त्र्यम्बकरुद्रआयुष्कर मृत्युंजय मन्त्र
- उच्छिष्ट महागणपति प्रयोग मंत्र -रुद्रयामल तंत्रउच्छिष्ट महागणपतिउच्छिष्ट महागणपति प्रयोग / तांत्रिक मंत्र
- कुण्डलिनी-स्तोत्राष्टकम्भगवती कुण्डलिनीस्तोत्राष्टकम्
- गणपति के 12 नाम मंत्र और 16 नाम स्मरण रुद्रयामल तंत्र सेगणपतिनामोपासना / नाम-स्मरण
- गणेश स्तवराज गणेशाष्टक पाठ विधि फल और सात मुद्राएंश्रीमहागणपतिस्तोत्र / गणेशाष्टक
- गुरु-पादुका ध्यानश्रीविद्यागुरुपादुकाध्यान
- गुरु-यन्त्र स्वरूप श्लोकश्रीगुरुयन्त्र-वर्णन श्लोक
- गुरुपादुका मन्त्रगुरुपादुकागुरु-पादुका मन्त्र
- तान्त्रिक शिव संजीवनी प्रयोग महामृत्युंजय मंत्र सम्पुट -रुद्रयामल तंत्रमहामृत्युंजय शिवमहामृत्युंजय मन्त्र सम्पुट
- पार्थिव शिवलिंग पूजा विधान और मंत्र -रुद्रयामल तंत्रश्रीसाम्बसदाशिवपार्थिव शिवलिंग पूजा विधान
- पौराणिक मृत्युंजय महारुद्र मंत्र -रुद्रयामल तंत्रमृत्युंजय महारुद्रपौराणिक मृत्युंजय मंत्र
- बटुक भैरव मंत्र और जप विधान -रुद्रयामल तंत्रश्रीबटुकभैरवआपदुद्धारण-बटुकभैरव-मन्त्र
- बृहद् महामृत्युंजय माला मंत्र बीज मंत्र सहित -रुद्रयामल तंत्रमहामृत्युंजयबृहद् महामृत्युंजय माला मन्त्र
- ब्रह्मरन्ध्र अजपा-जप निवेदन मन्त्रपरमात्माअजपा-जप निवेदन मन्त्र
- भगवान परशुराम गायत्री मंत्र और सात्त्विक ध्यान -रुद्रयामल तंत्रश्री परशुरामपरशुराम गायत्री मंत्र और सात्त्विक ध्यान
- भगवान शिव तांत्रिक उपासना ध्यान मंत्र -रुद्रयामल तंत्रभगवान शिवशिव ध्यान मंत्र
- भैरव 108 नाम हिन्दी नामावली पाठ -रुद्रयामल तंत्रबटुक भैरवहिन्दी नामावली पाठ / चौपाई स्तोत्र
- भैरवनाथ अनुज्ञा प्रार्थना मंत्र -रुद्रयामल तंत्रभगवान् भैरवनाथप्रार्थना मंत्र / अनुज्ञा मंत्र
- मणिपूरचक्र अजपा-जप निवेदन मन्त्रविष्णुअजपा-जप निवेदन मन्त्र
- महामृत्युंजय साधना मुख्य संकेत और रुद्राणी रुद्र ध्यान -रुद्रयामल तंत्रमहामृत्युंजय भगवान् महादेव / रुद्र-रुद्राणीमहामृत्युंजय साधना संकेत
- माँ कमला महालक्ष्मी श्रीं एकाक्षर चिन्तामणि मंत्र और ध्यान -रुद्रयामल तंत्रश्रीकमला एकाक्षर चिन्तामणि मंत्र
- माँ काली कवच पाठ आत्मरक्षा और शत्रु नाश -रुद्रयामल तंत्रश्री कालिकाकाली कवच-पाठ
- माँ छिन्नमस्ता षोडशाक्षरी मंत्र और ध्यान -रुद्रयामल तंत्रछिन्नमस्ता-भगवती / प्रचण्डचण्डिकाछिन्नमस्ता षोडशाक्षरी मन्त्र
- माँ तारा एकजटा पंचाक्षरी मंत्र और जप विधि -रुद्रयामल तंत्रश्रीएकजटापंचाक्षरी तारा मंत्र
- माँ दक्षिणाकाली बाईस अक्षरी मंत्र -रुद्रयामल तंत्रदक्षिणाकालिकाविद्याराज्ञी बाईस अक्षरी मन्त्र
- माँ नीलसरस्वती ताराष्टक स्तोत्र विद्या बुद्धि और वैभव प्राप्ति -रुद्रयामल तंत्रश्रीनीलसरस्वती / भगवती ताराताराष्टक स्तोत्र
- मृतसंजीवनी विद्या मंत्र -रुद्रयामल तंत्रमृत्युंजय भगवान् शिवमृतसंजीवनी विद्या मंत्र
- विलोमाक्षर त्र्यम्बक मृत्युंजय मंत्र -रुद्रयामल तंत्रत्र्यम्बक मृत्युंजयविलोमाक्षर मृत्युंजय मन्त्र
- विशुद्धचक्र अजपा-जप निवेदन मन्त्रजीवअजपा-जप निवेदन मन्त्र
- वेदोक्त दोनों त्र्यम्बक महामृत्युंजय मंत्र जप -रुद्रयामल तंत्रत्र्यम्बकवेदोक्त त्र्यम्बक मंत्र
- शरभेश्वर आकाश भैरव मंत्र और विधान -रुद्रयामल तंत्रश्रीशरभेश्वर भैरवशरभेश्वर भैरव मन्त्र-विधान एवं स्तोत्र
- श्री गुरु-स्मरण पद्यगुरु, परमगुरु और परमेष्ठी गुरुस्मरण-योग्य पद्य
- श्री त्रिपुर भैरवी महामंत्र विधान और ध्यान -रुद्रयामल तंत्रश्रीत्रिपुरभैरवी / श्रीभैरवीत्रिपुर भैरवी महामंत्र विधान
- श्री वराह अष्टाक्षर मंत्र प्रयोग और ध्यान -रुद्रयामल तंत्रश्रीवराहवराह अष्टाक्षर मंत्र प्रयोग
- श्रीविद्या उद्घाटन कवच पाठ और भय निवारण स्तोत्र -रुद्रयामल तंत्रश्रीविद्या / त्रिपुरा / श्रीमत्त्रिपुरसुन्दरीश्रीविद्या उद्घाटन कवच
- श्रीविद्या परा स्तोत्र इच्छा ज्ञान क्रिया शक्ति श्लोक -रुद्रयामल तंत्रश्रीविद्या / त्रिपुरललिता / कालीश्रीविद्या परा स्तोत्र श्लोक
- संक्षिप्त श्रीयन्त्र पूजा विधि और श्रीचक्र आवरण मंत्र -रुद्रयामल तंत्रमहात्रिपुरसुन्दरी / श्रीविद्या / श्रीचक्रस्थितसुन्दरीसंक्षिप्त श्रीयन्त्र पूजा मंत्र
- स्वर्णाकर्षण भैरव दारिद्र्य नाश महामंत्र और जप विधान -रुद्रयामल तंत्रश्रीस्वर्णाकर्षण भैरवस्वर्णाकर्षण भैरव महामंत्र
- स्वर्णाकर्षण भैरव मन्त्रमय स्तोत्र पाठ -रुद्रयामल तंत्रस्वर्णाकर्षण भैरवमन्त्रमय स्तोत्र
- स्वर्णाकर्षण भैरव स्तोत्र दारिद्र्य नाश पाठ -रुद्रयामल तंत्रस्वर्णाकर्षण भैरव-परमात्मास्वर्णाकर्षण भैरव स्तोत्र
- स्वाधिष्ठान अजपा-जप निवेदन मन्त्रब्रह्माअजपा-जप निवेदन मन्त्र
- ज्ञानमार्गोक्त पंचमकार स्तोत्रम्स्तोत्र
- पृथिव्यात्मक गन्ध समर्पण मन्त्रमानसोपचार-पूजा मन्त्र
- शतावरी गायत्री के साथ मृत्युंजय मंत्र जप -रुद्रयामल तंत्रअन्य मन्त्रों के साथ मृत्युंजय मन्त्र
- शुक्रोपासिता मृतसंजीवनी विद्या मंत्र दूसरा रूप -रुद्रयामल तंत्रमृतसंजीवनी विद्या मंत्र का अन्य रूप
- हंसःसोऽहम् भावना मन्त्रभावना मन्त्र